ग्राम समाचार, ब्यूरो रिपोर्ट। गोड्डा जिला के बोआरीजोर प्रखंड अंतर्गत दलदली गोपालपुर गांव में 26 जनवरी को प्रस्तावित रात्रि नाइट प्रोग्राम (आर्केस्ट्रा/ड्रामा) को लेकर आदिवासी समाज में विरोध तेज होता जा रहा है। वहीं 27 एवं 28 जनवरी को फुटबॉल प्रतियोगिता के आयोजन की भी घोषणा की गई है, जिसका प्रचार-प्रसार सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से लगातार किया जा रहा है। इस आयोजन को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई आदिवासी सामाजिक संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि रात्रि नाइट धमाका या अश्लील आर्केस्ट्रा कार्यक्रम आदिवासी संस्कृति का हिस्सा नहीं है और इससे समाज की अस्मिता पर आघात पहुंचता है।
आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद हेम्बरम ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि दलदली गोपालपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में रात्रि नाइट आर्केस्ट्रा कार्यक्रमों के दौरान पूर्व में गंभीर घटनाएं, यहां तक कि हत्या जैसी वारदातें भी सामने आ चुकी हैं। पूर्व मेला में हुए घटना की लेकर बोआरीजोर थाना में भी मामला दर्ज है इसके बावजूद इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होना प्रशासनिक लापरवाही और सामाजिक जिम्मेदारी की अनदेखी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर जिला प्रशासन को अवगत कराया जाएगा और रात्रि नाइट प्रोग्राम को बंद कराने की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि यदि मेला या सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करना ही है तो वह दिन के समय पारंपरिक और मर्यादित तरीके से किया जाए, जिससे किसी को आपत्ति न हो।
सामाजिक संगठन ऐभेन आखड़ा जागवार बैसी ने अनुमंडल पदाधिकारी को एक आवेदन सौंपते हुए क्षेत्र में चल रहे रात्रि आर्केस्ट्रा, अवैध जुआ और शराब पर लगे प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने की मांग की है। संगठन ने आवेदन के माध्यम से इन गतिविधियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। अवैध जुआ और शराब के साथ-साथ संताली आर्केस्ट्रा के नाम पर रात्रि कार्यक्रमों का आयोजन समाज में गलत प्रभाव डाल रहा है। इससे सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है और युवा वर्ग भटकाव की ओर जा रहा है।
ऐभेन आखड़ा जागवार बैसी ने प्रशासन से मांग की कि इस तरह के अवैध जुए, शराब और रात्रि संताली आर्केस्ट्रा को पूरी तरह बंद किया जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते इन गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो सामाजिक और सांस्कृतिक नुकसान और अधिक बढ़ सकता है। प्रशासन से अपेक्षा की गई है कि आवेदन पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
सामाजिक संगठनों का यह भी कहना है कि 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर इस तरह के रात्रि नाइट प्रोग्राम का आयोजन देश और समाज की गरिमा के विपरीत है। इस दिन को सामाजिक एकता, संविधान और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के लिए उपयोग किया जाना चाहिए, न कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालने के लिए।
आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान उसकी सादगी, परंपरा और सामूहिक मूल्यों से जुड़ी है। ऐसे में रात्रि नाइट आर्केस्ट्रा जैसे कार्यक्रमों को लेकर उठ रहे सवालों को प्रशासन और समाज दोनों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। समय रहते संतुलित निर्णय नहीं लिया गया तो इसका सामाजिक दुष्प्रभाव दूरगामी हो सकता है।



0 comments:
एक टिप्पणी भेजें