"एक दिया देश की आजादी के महानायकों, स्वतंत्रता सेनानियों और अमर शहीदों मिशन के अंतर्गत शहीद भगत सिंह चौक मीरपुर रेवाड़ी पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती 'पराक्रम दिवस' के रूप में उनके चित्र पर दीप जलाकर 'भारत माता की जय' 'वंदे मातरम', 'जय हिंद के नारों के साथ उनके बलिदान को नमन किया गया। कार्यक्रम में आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता सेनानी स्व. अमी लाल की वीरांगना व्योवृद्ध माता पतासी देवी 85 वर्ष और ग्लेशियर में शहीद जगमाल सिंह के परिवार संतरा देवी, रामचंद्र को गीता ग्रंथ, शाल, पौधा और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का चित्र व जीवनी भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में वीरांगना सावित्री देवी ने कहा आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस का देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज रहेगा। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी स्व.अमीलाल द्वारा नेताजी के साथ देश की आजादी के आंदोलन के संस्मरण सुनाते हुयें भावुक हो गई। इस दिवस पर प्रोफेसर सुशांत यादव आइजीयू ने कहा नेताजी सुभाष चंद्र बोस का विदेश की धरती पर आजाद हिंद फौज का गठन कर देश को अंग्रेजों की बेड़ियों से मुक्त करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। प्रोफेसर मंजू ने कहा बॉस ने कहा था महिलाओं के उत्थान हेतु कन्या शिक्षा, विधवा विवाह की वकालत और बाल विवाह का विरोध किया था।प्रोफेसर जया शर्मा ने कहा नेताजी नारी सशक्तिकरण के प्रबल समर्थक थे जिन्होंने महिलाओं को स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन से जोड़ा। उन्होंने आजाद हिंद फौज में झांसी की रानी रेजीमेंट बनाकर लक्ष्मी सहगल और नीरा आर्य को कमान सोंपी। उन्होंने कहा बॉस ने अनुसार महिलाओं के उत्थान के बिना समाज का उत्थान संभव नहीं है। उन्होंने कन्या शिक्षा, विधवा विवाह की वकालत कर बाल विवाह का विरोध किया था। शिक्षाविद उदय राज ने कहा नेताजी की बदौलत ही देश आजाद हुआ था।
कार्यक्रम के संयोजक सामाजिक कार्यकर्ता डॉ.आर.के.जांगड़ा विश्वकर्मा, राष्ट्रीय संयोजक, "एक दिया देश की आजादी के महानायकों, स्वतंत्रता सेनानियों और अमर वीर शहीदों ने कहा नेताजी की जयंती पीएम नरेंद्र मोदी के आवाहन पर पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाती है। उन्होंने कहा नेताजी ऐसी एकमात्र नेता थे जिन्हें अंग्रेजों ने देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए थे। उन्होंने कहा 17 जनवरी 1941 को अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंककर भारत की आजादी के लिए नेताजी बर्लिन पहुंचकर हिटलर से मदद मांगी थी। हिटलर नेताजी के साहस से प्रभावित थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पोर्ट ब्लेयर में राष्ट्रीय ध्वज 30 दिसंबर 1943 को जिमखाना ग्राउंड पर फहराया था और आजाद हिंद फौज की अस्थाई सरकार का गठन कर अंग्रेजों को भारत से भागने का ऐलान किया। नेताजी गीता ग्रंथ से गहराई से प्रेरित रहे थे।भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इस ऐतिहासिक दिन को आज हम याद कर रहे हैं। उन्होंने कहा पराक्रम दिवस नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अदम्य साहस, क्रांतिकारी सोच और राष्ट्र के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की भावना को समर्पित है। पराक्रम दिवस केवल एक तिथि नहीं,बल्कि यह भारत की आत्मा में बसे निडर राष्ट्रवाद का उत्सव है। पराक्रम दिवस हमें यह सिखाता है कि देशभक्ति भाषणों में नहीं, आचरण में दिखनी चाहिए। नेताजी का जीवन बताता है, अगर इरादा मजबूत हो तो इतिहास बदला जा सकता है।
भारत सरकार ने पीएम नरेंद्र मोदी की अगवानी में वर्ष 2021 से आधिकारिक रूप से इस दिन को “पराक्रम दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की। पराक्रम दिवस मनाने का उद्देश्य नेताजी के उस विचार को जीवित रखना है, जिसमें आज़ादी भीख में नहीं,संघर्ष से हासिल की जाती है।नेताजी ने यह साबित किया कि आज़ादी केवल अहिंसा का मार्ग नहीं, बल्कि साहस, संगठन और त्याग का परिणाम भी हो सकती है।यह दिन युवाओं में देशभक्ति, आत्मसम्मान और कर्तव्यबोध जगाने के लिए मनाया जाता है।नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे तेजस्वी और साहसी नेताओं में से एक थे।
पराक्रम दिवस हमें कर्तव्य से समझौता न करने की सीख देता है। कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा इंडिया गेट पर अंग्रेजी शासन जॉर्ज पंचम की प्रतिमा को हटाकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 28 फीट की प्रतिमा स्थापित करने पर और 'मेरी माटी मेरा देश' जैसे राष्ट्र को समर्पित कार्यक्रमों द्वारा देश के स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने हेतु आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर सुशांत यादव, प्रोफेसर मंजू, प्रोफेसर जया शर्मा, नीरज यादव, संतरा देवी, सुनीता देवी, तानिया, लक्ष्मी बाई, संजना, रामचंद्र, उदय राज नंबरदार, अंकित, मुकुल, रोहित, धीरज, विक्रम, साहिल, दीक्षित, शिव, सोमी आइजीयू के युवाओं सहित जनप्रतिनिधियों व गणमान्य वर्ग विशेष रूप से उपस्थित रहे।



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