भारतीय लोकतंत्र के महापर्व 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' के अवसर पर आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रेवाड़ी में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विद्यालय के प्रधानाचार्य विनोद यादव के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जो विद्यार्थियों के माध्यम से मतदान के महत्व को जन-जन तक पहुँचाने और समाज को जागरूक करने की एक उत्कृष्ट पहल है।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ:
मार्गदर्शन एवं नेतृत्व: प्रधानाचार्य विनोद यादव ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि युवा ही लोकतंत्र की असली शक्ति हैं और उन्हें अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए।
मतदाता शपथ: कार्यक्रम के दौरान शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ ने उपस्थित सभी अध्यापकों और विद्यार्थियों को निष्पक्ष एवं निर्भीक होकर मतदान करने की शपथ दिलाई।
गरिमामय उपस्थिति: इस अवसर पर वरिष्ठतम व्याख्याता नम्रता सचदेवा, मंजू लता,मनोज वशिष्ठ और विकास,भूपेंद्र,निशांत की गरिमामय उपस्थिति रही, जिन्होंने कार्यक्रम की सफलता में सक्रिय योगदान दिया।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि
प्रतिवर्ष 25 जनवरी को मनाया जाने वाला यह दिवस 1950 में भारतीय निर्वाचन आयोग की स्थापना का प्रतीक है। वर्ष 2026 की थीम, "वोट जैसा कुछ नहीं, वोट जरूर डालेंगे हम", इसी संकल्प को दोहराती है कि हर नागरिक का वोट देश के भविष्य के लिए निर्णायक है।
प्रमुख बिंदु के रूप में
युवा सशक्तिकरण को बढ़ावा देने हेतु विद्यालय स्तर पर ऐसे आयोजनों का उद्देश्य उन युवाओं को जागरूक करना है जो हाल ही में 18 वर्ष की आयु प्राप्त कर नए मतदाता बने हैं।
संवैधानिक अधिकार में 61वें संशोधन अधिनियम के माध्यम से मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई थी, ताकि लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
जन-जागरूकता हेतु विद्यार्थियों ने न केवल खुद शपथ ली, बल्कि समाज के हर वर्ग को जागरूक करने का संकल्प भी लिया।
अतःराजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रेवाड़ी द्वारा की गई यह पहल यह दर्शाती है कि शिक्षा और जागरूकता के समन्वय से ही एक जिम्मेदार चुनावी संस्कृति का निर्माण संभव है।
प्रमुख शिक्षाविदों के विचार
1. प्रधानाचार्य विनोद यादव ने कहा,"लोकतंत्र की नींव केवल कागजों पर नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर टिकी होती है। विद्यालय में इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हमारे विद्यार्थियों को यह समझाना है कि वे केवल भविष्य के नागरिक नहीं, बल्कि वर्तमान के सजग प्रहरी भी हैं। जब विद्यार्थी अपने घर और पड़ोस में मतदान का संदेश ले जाते हैं, तो उसका प्रभाव गहरा होता है। हमारा लक्ष्य 'शत-प्रतिशत मतदान' के संकल्प को सिद्ध करना है।"
2. वरिष्ठतम व्याख्याता नम्रता सचदेवा ने बताया,"मतदान केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक नैतिक उत्तरदायित्व है। एक शिक्षित समाज वही है जहाँ प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी प्रलोभन या दबाव के अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करे। आज की युवा पीढ़ी को निर्वाचन प्रक्रिया की शुद्धता और उसकी शक्ति के प्रति जागरूक करना हमारी प्राथमिकता है। 'वोट जैसा कुछ नहीं' का मंत्र हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को और भी सुदृढ़ बनाता है।"
3. शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ ने अपने उद्बोधन में कहा,"भारत दुनिया का सबसे जीवंत लोकतंत्र है, और इसकी जीवंतता हमारे वोट में निहित है। मतदाता शपथ केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक पवित्र संकल्प है। आज हमने न केवल शपथ ली है, बल्कि यह प्रतिज्ञा की है कि हम समाज के अंतिम छोर तक खड़े व्यक्ति को मतदान के प्रति जागरूक करेंगे। याद रखें, आपका एक वोट देश की दिशा और दशा बदलने की ताकत रखता है।" कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान के बाद भारत माता के जयघोष के साथ सभी के धन्यवाद के साथ हुआ।


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