ग्राम समाचार ब्यूरो रिपोर्ट महगामा(गोड्डा)- नगर निकाय चुनाव का बीते दिन घोषणा होते ही महागामा नगर पंचायत में अध्यक्ष पद को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।
इसी कड़ी में नगर पंचायत अध्यक्ष पद को एसटी (अनुसूचित जनजाति) आरक्षित घोषित किए जाने से संभावित प्रत्याशियों में असंतोष देखने को मिल रहा है।
आरक्षण की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सूत्रों के अनुसार महागामा नगर पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति की आबादी अपेक्षाकृत कम बताई जा रही है। इसके बावजूद अध्यक्ष पद को एसटी कोटे में रखे जाने पर कई संभावित दावेदारो ने सवाल खड़े कर रहे हैं। दावेदारों का कहना है कि 2013 के बाद दो बच्चों की शर्त सहित अन्य मापदंडों को ध्यान में रखते हुए भी आखिर किस आधार पर महागामा नगर पंचायत को एसटी आरक्षण में शामिल किया गया, जबकि जनसंख्या के आंकड़े कुछ और ही तस्वीर पेश करते हैं।
आरक्षण के इस फैसले से नाराज संभावित प्रत्याशी खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। उनका मानना है कि इस निर्णय से सामान्य वर्ग के दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
वहीं दूसरी ओर स्थिति यह भी है कि आरक्षण की घोषणा के बावजूद अब तक अध्यक्ष पद के लिए किसी भी प्रत्याशी ने औपचारिक रूप से दावेदारी पेश नहीं की है, जो आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते हुए इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो आने वाले दिनों में चुनावी माहौल और अधिक गरमा सकता है।
फिलहाल महागामा नगर पंचायत में आरक्षण को लेकर असमंजस और नाराजगी का माहौल बना हुआ है।और यह मामला आगे और तूल पकड़ सकता है।
वहीं नगर पंचायत वासियों के कहना है कि जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण होना चाहिए। ताकि सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके।
अचानक हुए इस फैसले से लोगों में भ्रम एवं नाराजगी है। प्रशासन को मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो चुनाव के दौरान इसका असर देखने को पड़ सकता।
ब्यूरो रिपोर्ट, ग्राम समाचार, महगामा (गोड्डा)

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