Rewari News :: अटूट राष्ट्रभक्त व अध्यात्म के सागर थे स्वामी विवेकानंद :: अमित स्वामी

राष्ट्रीय युवा दिवस स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस के अवसर पर यंग मैन्स एसोसिएशन आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित स्वामी ने संस्था के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ संस्था के आटो मार्किट स्थित कार्यालय में स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित करके हार्दिक श्रृद्धा सुमन अर्पित किए। संस्था प्रमुख अमित स्वामी ने स्वामी विवेकानंद के ओजस्वी जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में जन्मे स्वामी विवेकानंद का मूल नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। परिवार में धार्मिक माहौल और मिले संस्कारों के कारण बचपन से ही धर्म और ईश्वर के प्रति उनकी जिज्ञासा बनी रही। उन्होनें धर्म, दर्शन, इतिहास, सामाजिक ज्ञान व सभी हिन्दु धर्मग्रंथों व पाश्चात्य धर्मग्रंथों का गहनता से अध्ययन किया और कला स्नातक की उपाधि अर्जित की। 25 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने घर छोडकर सन्यास धारण कर लिया और पैदल ही भारत भ्रमण पर निकल पड़े। इसी यात्रा के दौरान राजस्थान के खेतड़ी रियासत के राजा कुंवर अजीत सिंह के आग्रह पर उन्होंने अपना नाम स्वामी विवेकानंद रख लिया। सन 1893 में वे विश्व भ्रमण पर निकल पड़े और इसी दौरान 11 सितम्बर 1893 को अमेरिका के शिकागो में आयोजित प्रथम विश्व धर्म संसद में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने ऐसा ओजस्वी भाषण दिया कि सभी उपस्थित धर्मगुरु, विद्वान और पूरा विश्व उनकी आभा से अचम्भित हो गया। उन्होंने जापान, चीन, कनाड़ा, जर्मनी, इंग्लैंड आदि की यात्रा करते हुए हिन्दु धर्म का सशक्त और प्रेरणादायक संदेश पूरी दुनिया में फैलाया व अपनी बहुमुखी प्रतिभा की अमिट छाप से पूरी दुनिया को अलौकिक कर दिया। स्वामी रामकृष्ण परमहंस उनके गुरु थे। मानवता और मानव सेवा उनके संदेश का मुख्य आधार थे। वर्ष 1897 में भारत लौटने पर उन्होने कलकत्ता (हावड़ा) के बेलूर में स्वामी रामकृष्ण मिशन की स्थापना की और इस मिशन के तहत समाजसेवा और परोपकार के कार्य ना केवल भारत अपितु विश्व भर में किए जो आज भी कार्यरत है। वर्ष 1900 में उन्होने पेरिस में आयोजित दूसरे विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लिया। 4 जुलाई 1902 को उन्होने बेलूर (कलकत्ता) में महासमाधि ली। उन्होने युवाओं को मानसिक सबलता, करूणा, राष्ट्रभक्ति के साथ-साथ शारीरिक बल के लिए भी प्रेरित किया और राष्ट्रवाद का संदेश दिया। उन्होने वेदांत दर्शन की रचना की और युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि राष्ट्र का युवा अगर अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समर्पित प्रयास करे तो उस राष्ट्र की उन्नति निश्चित है।


इस अवसर पर हरचंद जांगड़ा, ईश्वर पहलवान, सोनू यादव, प्रवीण अग्रवाल, ललित गुप्ता, मनीष यादव, राजेन्द्र सैनी, पारस चौधरी, गौरव हरित, धर्मवीर प्रजापत, रामू चौधरी, महाबीर, मयंक, खुशी राम गौड़ आदि विशेष रुप से उपस्थित थे।

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Editor - राजेश शर्मा : रेवाड़ी (हरियाणा)

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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