Bounsi News: आदिशक्ति की भक्ति माता के मंदिर परिवर्तन पर हर कदम पर दी गई थी बली, दुर्गा मंदिर में प्रतिमा स्थापित कर लगता है भव्य मेला

ग्राम समाचार,बौंसी,बांका। बौंसी प्रखंड क्षेत्र के श्यामबाजार और पाड़ेजान दुर्गा मंदिर की कहानी अत्यंत रोचक और ऐतिहासिक है। जानकारी के अनुसार 19वीं सदी के आरंभिक काल में क्षेत्र के जमींदारों द्वारा श्यामबाजार दुर्गा मंदिर में स्थापित देवी का नेम निष्ठा और देवी पूजा पद्धति के साथ स्थानांतरण पाड़ेजान किया गया था। जहां सैकड़ों वर्ष से आज तक देवी की प्रतिमा स्थापित कर जमींदार परिवार के लोगों द्वारा विराट पूजा और मेले का आयोजन किया जाता है। प्रत्येक वर्ष विजयादशमी के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। यहां की ऐतिहासिक जानकारी देते हुए जमींदार परिवार की वर्तमान पीढ़ी  नीरोज प्रसाद सिंह ने बताया कि, उनके पूर्वजों से मिली जानकारी के अनुसार जमींदार बद्री नारायण सिंह की पत्नी विराज कुमारी ने श्यामबाजार देवी दुर्गा की पूजा व्यवस्था को यहां से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पाड़ेजान दुर्गा मंदिर में स्थापित किया। इस दौरान मार्ग में कदम कदम पर बलि देकर खून के धार पर माता को पांडे जान मंदिर में 


फाइल फोटो

स्थापित कर पूजा अर्चना आरंभ की गई। मालूम हो कि जमींदार परिवार में वर्तमान 9 परिवारों के द्वारा ही अपनी अपनी पाली से इस पूजा की सारी तैयारियों का खर्च वहन किया जाता है। इस वर्ष पाली के अनुसार नीरोज कुमार सिंह के द्वारा अपनी पाली में पूजा किया जा रहा हैं। इस दुर्गा मंदिर के रहस्य के बारे में निरोज कुमार सिंह ने बताया गया कि, रानी विराज कुमारी ने देवी स्थापित करने के प्रथम वर्ष कोई बली ना देकर वैष्णवी दुर्गा का पूजा किया था। मगर इसके बाद से आज तक यहां फिर से बलि प्रथा अनवरत जारी है। एक दशक पूर्व ही इस मंदिर को इन लोगों के माध्यम से भव्य स्वरूप दिया गया है। दशमी की मेला के बाद यहां पास ही स्थित डकाय नदी में सम्पूर्ण सिकंदरपुर वासियों के द्वारा माता की भव्य प्रतिमा को कांधे पर उठा कर विसर्जित किया जाता है। यहां मेले के आयोजनकर्ता में मुख्य रूप से श्यामा प्रसाद सिंह, निरोज कुमार सिंह, मनोज कुमार सिंह, गिरजा प्रसाद सिंह, अंबिका प्रसाद सिंह, शारदा प्रसाद सिंह,कल्याण कुमार सिंह,जय प्रकाश सिंह तथा ललन कुमार सिंह के पारिवारिक सदस्यों का भी महत्वपूर्ण योगदान सदा रहता है। इन्हीं 9 परिवारों के द्वारा मंदिर में पूजा अर्चना,प्रतिमा स्थापित,मेले का आयोजन विधिवत किया जाता है। बताया जाता है कि यहां मंदिर में पहले माता पिंडी रुप में थीं। लगभग 1905 से पाड़ेजान में स्थित देवी मंदिर में प्रतिमा स्थापित की जा रही है। वहीं दूसरी ओर  श्यामबाजार स्थित इसके पुराने दुर्गा मंदिर में भी स्थानीय लोगों के विचार और सहयोग के बाद कई वर्षों में दुर्गा पूजा पर मूर्ति स्थापित कर एकादशी को भव्य मेले का आयोजन किया जा रहा है और यहां भी मनोकामना पूर्ण होने पर बलि दी जाती है। इस मंदिर को भी स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से विराट स्वरूप दिया गया है। जहां भव्य पूजा अर्चना की जा रही है। 

कुमार चंदन,ग्राम समाचार संवाददाता,बौंसी।

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Editor - कुमार चंदन,ब्यूरो चीफ,बाँका,(बिहार)

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