बच्चो में तुतलाना/हकलाना एक सामान्य समस्या है। तुतलाने वाले बच्चे बोलते समय बीच बीच में शब्दों को स्पष्ट और सहज रूप से नहीं बोल पाते है या बोलते समय अक्सर बीच बीच में अटक जाते ह। तुतलाने वाले बच्चों को पता होता है की उन्हें क्या बोलना है पर वह उसे बोलते समय अटकते है या तुतलाते है। वे किसी शब्द को लंबा खींच सकते है,किसी स्वर या व्यंजन को गलत तरह से उच्चारित कर सकते है या कोई मुश्किल शब्द आने पर अटक सकते है ।
बच्चों में तुतलाना या हकलाना बच्चों में बोलना सीखते समय सामान्य बात है। कई बार बढ़ती उम्र के समय बच्चों की बोलने की क्षमता का विकास उनके मानसिक विकास के बाकी पहलुओं से थोड़ा पीछे हो सकता है जिसे अधिकतर बच्चे समय के साथ कवर कर लेते है ।
कभी कभी तुतलाना बड़े बच्चों में और वयस्कों में भी देखा जा सकता है जिसकी वजह से वे दूसरों के सामने बोलते हुए खुद को असहज महसूस करने लगते है ।
तुतलाना या हकलाना वर्तमान में अधिकतर केसेज में पूरी तरह से ठीक हो सकता है जिसके लिए स्पीच थेरेपी, संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी उत्तम इलाज है।
लक्षण
हकलाने वाले बच्चो में निम्नलिखित लक्षण देखने को मिल सकते है:
1.किसी शब्द, वाक्यांश या वाक्य को शुरू करने में कठिनाई होना.
2.किसी शब्द को या किसी ध्वनि को किसी शब्द के भीतर लंबा खींचना.
3.किसी ध्वनि, शब्दांश या शब्द की पुनरावृत्ति करना.
4.कुछ शब्दांशों या शब्दों को बोलते हुए अटकना ,या एक शब्द को बोलते हुए बीच में रुकना.
5.अगले शब्द पर जाने में कठिनाई का अनुभव होने पर अनावश्यक शब्द जैसे "हम्म,उम्" का इस्तेमाल करना.
6.किसी शब्द को बोलने के लिए चेहरे या ऊपरी शरीर में अत्यधिक तनाव या जकड़न होना.
7.बोलने में असहज होना.
8.प्रभावी ढंग से संवाद करने की सीमित क्षमता.
9.तेज आँख झपकना
10.होठों या जबड़े के अनावश्यक मूमेंट होना
11.सर झटकना
12.मुट्ठी बंद करना
थकान दबाव या उत्तेजना की मनोस्थिति होने पर भी हकलाना या तुतलाना बढ़ जाता है।
तुतलाने वाले बच्चे अक्सर फोन पर या किसी समूह के समक्ष बोलने में ज़्यादा असुविधा महसूस करते है । लेकिन तुतलाने वाले बच्चे अक्सर खुद से बात करते हुए या किसी समूह के साथ एक साथ गाते या बोलते हुए कम तुतलाते है।
बच्चों में 2 से 5 साल की उम्र के बीच तुतलाना या हकलाना एक आम बात है जो समय के साथ खुद ही ठीक हो जाती है।
अब ऐसे में सवाल आता है की फिर अगर आपका बच्चा तुतलाता है तो आपको कब अपने बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह करनी चाहिए?
अगर तुतलाना :-
1.छह महीने से अधिक समय तक रहता है.
2.अन्य भाषा सम्बन्धी समस्याओं के साथ होता है.
3.बढ़ता जा रहा है.
4.मांसपेशियों में कसाव या बोलने में स्पष्ट रूप से संघर्ष के साथ होता है.
5.स्कूल में, काम पर या सामाजिक बातचीत में प्रभावी ढंग से संवाद करने की क्षमता को प्रभावित करता है.
6.चिंता या भावनात्मक समस्याओं का कारण बनता है, जैसे डर या उन स्थितियों से बचना जहां बोलने की आवश्यकता होती है.
7.एक वयस्क के रूप में शुरू होता है.
तो आपको अपने बाल रोग विशेषज्ञ से अवश्य सलाह लेनी चाहिए।
हकलाने के मुख्य कारण:
हकलाने के कारणों में विकासात्मक और अनुवांशिकी मुख्य कारण है। इसके अलावा भावनात्मक दबाव,दिमागी चोट या दिमागी बीमारियों की वजह से भी तुतलाने की समस्या हो सकती है।
तुतलाने या हकलाने की समस्या कहां ज्यादा देखी जा सकती है?
1.महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हकलाने की संभावना अधिक होती है.
2.परिवार में तुतलाने की हिस्ट्री होना.
3.तनाव.
तुतलाने/हकलाने की वजह से बच्चो में क्या क्या समस्याएं हो सकती है?
1.दूसरों के साथ संवाद करने में समस्या होना.
2.बोलने में घबराहट होना.
3.उन स्थितियों से बचना जिनमें बोलने की आवश्यकता होती है.
4.सामाजिक कार्यों में , स्कूल में , काम में हानि होना.
5.तंग करना या चिड़ाना.
6.आत्म विश्वास की कमी होना.
क्या तुतलाने का इलाज संभव है?
तुतलाने/हकलाने का इलाज संभव है।
इसके लिए अपने चिकित्स्क से संपर्क करे।
वात्सल्य अस्पताल,श्री कृष्ण भवन के सामने, बीडीपीओ ऑफिस के निकट,गढ़ी बोलनी रोड रेवाड़ी(अंबेडकर चौक से 100 मीटर की दूरी पर), में तुतलाने/हकलाने सम्बन्धी सभी बिमारियों का इलाज उपलब्ध है.
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