Bounsi News: प्रखंड क्षेत्र में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ सूर्योपासना छठ पर्व का संध्याकालीन अर्घ्य

ग्राम समाचार,बौंसी,बांका। चार दिवसीय सूर्य उपासना छठ महापर्व के तीसरे दिन शाम को यानी पहली अर्घ्य (संध्याकालीन) पूरे प्रखंड में बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। वही प्रखंड में बहुत से लोगों ने घर में ही छठ पर्व का प्रथम अर्घ्य दिया। साथ ही घाट पर भी लोगों की भीड़ दिखी। श्रद्धालु घाट पर जाने से पहले बांस की टोकरी में पूजा की सामग्री, मौसमी फल, ठेकुआ, कसर, गन्ना आदि सामान सजाया और इसके बाद घर से नंगे पैर घाट पर पहुंचे। छठ पहला ऐसा पर्व है। जिसमें डूबते सूर्य की पूजा की जाती है और उन्‍हें अर्घ्य दिया जाता है। लोगों में काफी उत्साह देखी गई। मालूम हो कि पिछले 2 वर्षों से कोरोना 


काल को लेकर छठ पर्व क्वॉरेंटाइन हो गया था। इस वर्ष लोगों को थोड़ी राहत मिली। जिस वजह से श्रद्धालुओं में अच्छा खासा उत्साह देखा गया। पूरा प्रखंड क्षेत्र छठ पूजा के मधुर गीत कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए..., जोड़े-जोड़े नारियल तोहे चढ़इबो ना..., ऐ छठी मइया होई ना सहइया... से गुंजायमान हो गया। सज-धजकर तैयार छठघाटों पर बुधवार को डूबते हुए सूर्य को व्रतियों ने अर्घ्य दिया। ऐसी मान्यता है कि, सूर्य षष्ठी यानी कि छठ पूजा के तीसरे दिन शाम के वक्त सूर्यदेव अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं। इसलिए संध्या अर्घ्य देने से प्रत्यूषा को अर्घ्य प्राप्त होता है। प्रत्यूषा को अर्घ्य देने से इसका लाभ भी अधिक मिलता है। मान्यता यह है कि, संध्या अर्घ्य देने और सूर्य की पूजा अर्चना करने से जीवन में तेज बना रहता है और यश, धन , वैभव की प्राप्ति होती है। शाम को अस्ताचलगामी सूर्यदेव को पहला अर्घ्य दिया जाता है। इसलिए इसे संध्या अर्घ्य कहा जाता है। इसके पश्चात विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है। संध्या को अर्घ्य देने के लिए छठव्रती पूरे परिवार के साथ दोपहर बाद ही घाटों की ओर रवाना होते हैं।  इस दौरान पूरे रास्ते कुछ व्रती दंडवत करते जाते हैं। सूर्य देव को अर्घ्य देने से पहले रास्ते भर उन्हें जमीन पर लेटकर व्रती प्रणाम करते हैं। दंडवत करने के दौरान आस पास मौजूद लोग छठव्रती को स्पर्श कर प्रणाम करते हैं, ताकि 


उन्हें भी पूण्य की प्राप्ति हो सके। प्रखंड क्षेत्र के ब्रह्मपुर,थाना कॉलोनी सहित अन्य जगहों पर श्रद्धालुओं ने घर पर ही अस्ताचलगामी सूर्य देव को पहला अर्घ्य दिया। वहीं दूसरी ओर बौंसी प्रखंड के ऐतिहासिक मंदार पर्वत की तराई में अवस्थित पापहरणी सरोवर घाट, बगडुम्मा,श्याम बाजार एवं सिकंदरपुर गांव में अस्ताचलगामी सूरज को पहली अर्घ्य बड़े ही हर्षोल्लास के साथ दिया गया। सिकंदरपुर गांव के दोनों घाटों मंदिर घाट एवं सरकारी घाट पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ देखी गई। सुबह से ही गांव के नवयुवक  छठ पूजा के संध्या अर्घ्य की तैयारी में जुटे हुए थे। नव युवकों में नीरज कापरी, राकेश कापरी, सुभाष कापरी, चंद्रशेखर सिंह, रुपेश चौधरी, विक्की शर्मा, अमित पासवान, दीपक यादव, अनंत सिंह सहित कई नवयुवकों का छठ पूजन में घाट की विधि व्यवस्था को बनाए रखने में काफी योगदान रहा। छठ का चौथा दिन यानी कि सप्तमी के दिन सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देकर विधि-विधान से पूजा संपन्‍न की जाएगी। इस दिन घाटों पर खास रौनक दिखती है और महिलाएं छठी माता के गीत गाती हैं। सूर्योदय के साथ ही सुबह का अर्घ्य दिया जाता है और इस तरह छठ पूजा का पारण यानी समापन होता है। इसके बाद ही घाटों पर प्रसाद दिया जाता है। 

कुमार चंदन,ग्राम समाचार संवाददाता,बौंसी।

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