ग्राम समाचार बौंसी,बांका।
भारत देश में विभिन्न स्थानों में नागनाथ व नागेश्वरनाम से शिवलिंग हैं पर अगदेश व निषध देश में नहीं हैं । नागलोक(पाताल)के बासुकीनाथ समुद्र के बीच दारूका वन में नागेश ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रादुर्भुत् हुए। वही नागेश कालांतर में शैव सम्प्रदाय के राजा वीरसेन के द्वाराउसके निषध देश में जो अंगदेश के दक्षिण भाग में जो संताल परगना कहलाता है, में प्रकट हुए । वही आज नागेश्वर लिंग बासु के द्वारा पूजित होने पर बासुकीनाथ कहाये गये । धाम में सेवायत के रूप में कार्य करनेवाले पंडों की पीढ़ियॉ इस प्रकार हैं:- बासु ,लभर,कुशर,,सनाई,गनाई,जयनारायण, गंभार,मंगर,उदय,वंश,शिव,हारो,त्रिभुवन,दीलो,मीलो, अशर्फी,मोहर,सहेबा,सनुपा,मंदर,दुर्गा,चन्द्रकांत, विद्यानंंद,भोला,बामेश्वर,नंदेश्वर,केदार,महेशानंद, बाबूलाल,संतू, सतीश ,
चिरंजीव ,सोम ,लालजी ,शंभू ,धनी ,वंशी ,युगल ,मख ,भागी ,लाली ,कारू ,केशन ,शशि ,नंद कुमार ,कन्हाई ,गौरी ,धरणी ,भरोसी ,जयंती ,बखौरी ,आजेश्वर ,रामेश्वर ,तारेश्वर ,पांडू ,धोधो ,दुखहरण ,फुलेश्वर ,हरदयाल ,सिंहेश्वर ,काखू ,नीलकंठ ,नकुल ,राधाकांत ,कंतलाल ,पारसनाथ ,योगेन्द्र ,त्रिवेणी सहित कुल 11 पीढ़ियॉं की सूची मुझे 1951 ई. में गोड्डा के जनार्दन मिश्र 'परमेश' द्वारा रचित एवं बासुकीनाथ के पं. जटाशंकर झा द्वारा प्रकाशित " श्री नागेश बासुकीनाथ महात्म्य " से मिली । नागलोक(पाताल)के बासुकीनाथ समुद्र के बीच दारूका वन में नागेश ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रादुर्भुत् हुये। वही नागेश कालांतर में शैव सम्प्रदाय के राजा वीरसेन के द्वाराउसके निषध देश में जो अंगदेश के दक्षिण भाग में जो संताल परगना कहलाता है में प्रकट हुये । वही आज नागेश्वर लिंग बासु के द्वारा पूजित होने पर बासुकीनाथ कहाये गये ।
प्रस्तुति - मनोज कुमार मिश्र, शोधलेखक मंदार (बॉंका)
कुमार चंदन, ग्राम समाचार संवाददाता,बौंसी।

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