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Godda News:video - राजमहल परियोजना को जमीन नहीं देने के लिए ग्रामीणों ने गाड़े लाल झंडी, रैयतों ने कोयला खनन का किया विरोध


ग्राम समाचार, बोआरीजोर(गोड्डा)। कोयला उत्खनन कार्य को लेकर राजमहल परियोजना द्वारा तालझारी,भेरंडा,पाहाडपुर गांव के नजदीक कराए जा रहे उत्खनन कार्य पर स्थानीय आदिवासियों द्वारा कड़ी आपत्ति जताई जा रही है। 
इन गांवों के हाजारों की संख्या में आदिवासीयों ने डुगडुगी बजाते हुए अपनी सीमा पर लाल झंडी गाड़ कर सीमांकन कर दिया।

बेहद चौंकाने वाला यह मामला झारखंड प्रदेश के गोड्डा जिला में स्थित राजमहल परियोजना ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड ललमटिया कोयला खदान से है। 
ग्रामीण लामबंद होकर इस बात पर अड़ चुके हैं कि राजमहल परियोजना को किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देना चाहते हैं। आदिवासियों ने कहा प्रखंड बोआरीजोर शेड्यूल एरिया में आता है यहाँ पेसा कानून लागू है बिना ग्राम सभा किए जमीन खरीद बिक्री व स्थानांतरण नहीं किया जा सकता है। जबकि ईसीएल प्रबंधक ग्रामीणों को प्रलोभन देकर उनकी जमीन को अधिकृत कर खनन कार्य करना चाहता है।

वही बताया गया की पिछले दिनों ईसीएस प्रबंधन और तालझारी मौजा के बीच 2016 में लिखित वार्ता हुई थी जिसमें इस बात की सहमति बनी थी कि ईसीएल प्रबंधन द्वारा तालझारी मौजा से 50 फीट तक उत्खनन कार्य नहीं किया जाएगा। लेकिन अब ग्रामीणों का आरोप है कि इस ईसीएल प्रबंधन द्वारा जबरन भेरंडा,तालझारी,पाहाड़पुर रैयतों की जमीन पर खनन कार्य शुरू करने की साजिश की जा रही है। आप तस्वीर पर देख सकते हैं किस तरह से ईसीएल प्रबंधन खनन कार्य को ताक में रखकर उसके पूर्व किऐ गये सीमाकंन का उल्लंघन किया गया। जिससे हाजारों की संख्या में तालझारी भेरेंडा पहाड़पुर के आदिवासियों ने प्रबंधन के द्वारा किए जा रहे उत्खनन कार्य के विरोध में जबरदस्त विरोध किया।आदिवासियों ने बताया परियोजना हमारे मौजा से 50 फीट दूरी में खनन करने की लिखित बात हो गई है इसके बावजूद ईसीएल प्रबंधन द्वारा हमारे सीमा पर खनन कार्य आगे बढ़ा दिया गया है। ग्रामीणों ने कहा कि हम किसी कीमत पर जमीन नहीं देना चाहते हैं। 

आदिवासियों ने बताया कि राजमहल परियोजना ने विगत दो दशकों में कई गांवों में जमीन अधिग्रहण कर विस्थापित किया लेकिन नियम कानून के अनुसार खनन कार्य करने के बाद जमीन का समतलीकरण कर संबंधित रैयतों को वापस नहीं किया गया इससे लोगों में आक्रोश है। आदिवासियों ने कहा जमीन के साथ विशेष लगाव है जमीन के बिना आदिवासी समाज नहीं रह सकता, जमीन हमारे मां के दूध के समान हैं किसी भी कीमत पर हम अपनी मां के दूध को नहीं बेच सकते, ईसीएल प्रबंधन हमारे साथ जबरदस्ती ना करें अन्यथा हम मजबूर होकर प्रबंधन के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन करने की भी बात कही। इस संबंध में जब फोन से राजमहल परियोजना के सीजीएम डी० के० नायक से पूछे जाने पर उन्होंने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। इस पर सबकी निगाहें लगी हुई है यह लड़ाई किस मुकाम पर पहुंचती है अब देखना बाकी है।

                                      -ग्राम समाचार, बोआरीजोर(गोड्डा)।


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Editor - विलियम मरांड़ी।

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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