ग्राम समाचार, भागलपुर। जिले के गोराडीह प्रखंड के तरछा गांव में रविवार को मौसम अनुकूल कृषि योजनान्तर्गत किसानों के लिए ‘‘प्रशिक्षण-सह-प्रक्षेत्र भ्रमण’’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ॰ अजय कुमार सिंह, कुलपति बिहार कृषि विश्वविद्यालय, डॉ॰ आर॰के॰ सोहाने निदेशक प्रसार शिक्षा और डॉ॰ आर॰एन॰ सिंह सह निदेशक प्रसार शिक्षा द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। सर्व प्रथम कुलपति निदेशक प्रसार शिक्षा एवं सह निदेशक प्रसार शिक्षा द्वारा दामूचक, लौंगाई एवं तरछा में तकनीकी प्रदर्शन का निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर डॉ॰ विनोद कुमार वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान कृषि विज्ञान केन्द्र सबौर द्वारा उपस्थितियों एवं किसानों का स्वागत किया तथा मौसम अनुकूल कृषि अन्तर्गत चयनित गाँवों यथा गोराडीह प्रखण्ड के दामूचक, तरछा, कासिमपुर, लौंगाई, गोडा एवं सन्हौला प्रखण्ड के सकरामा गाँव में तकनीकी प्रदर्शन की जानकारी दी गई। जानकारी के क्रम में उन्होंने बताया कि खरीफ मौसम में मेढ़ पर मक्के की 15 एकड़, धान की सीधी बुवाई 197.5 एकड़ और लेजर लैंड लेवलर से खेत समतलीकरण 100 एकड़ में किया गया। जल संचयन एवं मेढ़बंदी 78 एकड़ और वैकल्पि सुखा एवं गीला द्वारा धान की खेती 78 एकड़ में किया गया। साथ ही उन्होंने बताया कि रबी मौसम में मेढ़ पर मक्का की बुवाई 150 एकड़, शून्य जुताई से गेहूँ की बुवाई 500 एकड़, मेढ़ पर गेहूँ 50 एकड़, मेढ़ पर मक्का एवं आलू की अन्तर्वर्ती खेती 200 एकड़, शून्य जुताई से मसूर की बुवाई 50 एकड़, शून्य जुताई से चना की बुवाई 50 एकड़, मेढ़ पर सरसों की खेती 75 एकड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसे आप किसान भाईयों के सहयोग से पूरा किया जाएगा। इस अवसर पर किसान अशोक यादव, भगवान यादव, विनय कुमार सिंह, राजेश कुमार, सुनील कुशवाहा ने योजना अनुभवों को को अन्य किसानों के बीच बाँटा। इस अवसर पर डॉ॰ अजय कुमार सिंह, कुलपति, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, डॉ॰ आर॰के॰ सोहाने, निदेशक प्रसार शिक्षा, डॉ॰ आर॰एन॰ सिंह, सह निदेशक प्रसार शिक्षा ने बताया कि विश्वविद्यालय शिक्षण, शोध, प्रसार यथा नवनीनम तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी पत्रिका एवं वीडियों के माध्यम से किसानों को लाभान्वित करने का प्रयास करती रहती है। उन्होंने कहा यह परियोजना युवाओं को कृषि से जोड़ने हेतु प्रोत्साहित करना है। आज युवा कृषि से विमुख हो रहे है एवं रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों एवं देशों की ओर पलायन कर रहे है। उन्हें संसाधन एवं तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराकर कृषि कार्य की ओर प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में आपार संभावनाएँ है। साथ ही उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र एवं बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर सदैव आप किसानों भाईयों के सहयोग के लिए तत्पर है। यदि आपकों कोई समस्या आती है तो आप हमारे पास आये, हम यथासंभव आपकी मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अन्तर्गत मौसम अनुकूल कृषि योजना का संचालन किया जा रहा हैं। इस योजना से किसानों की लागत कम करने, समय की बचत एवं आय में वृद्धि के लिए वैज्ञानिक एवं यांत्रीकरण विधि से खेती की तकनीकी प्रदर्शन कर किसानों को जागरूक किया जाना है। इससे उनके कृषि कार्यों यथा आर्थिक कमी, बाजार की समस्या का निराकरण होगा, साथ ही अच्छी आमदनी भी होगी। उन्होंने कहा जलवायु परिवर्त्तन की समस्या का हर कोई सामना कर रहा है और आने वाले समय यह समस्या और बढ़ता जाएगा। जलवायु परिवर्त्तन का ही परिणाम है कि आज बहुत सारे लोग पानी की समस्या से जुझ रहे है। क्योंकि दिन प्रति दिन जल स्तर नीचे जा रहा है। किसान को आने वाले समय में कृषि में जल की समस्या से जुझना होगा। इसके लिए किसानों को स्मार्ट होना होगा एवं आधुनिक कृषि पद्धति को अपनाना होगा। कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक ई॰ पंकज कुमार एवं शस्य विज्ञान के वैज्ञानिक डॉ॰ अजय कुमार मौर्य द्वारा समसमायिक जानकारी उपलब्ध कराई गई एवं किसानों के साथ चर्चा की गई। इस अवसर पर डॉ॰ आशीष चौरसिया, अल्काज्योति शर्मा, शशि कान्त सहित ‘‘मौसम अनुकूल कृषि योजना’’ के चयनित गाँवों के 280 किसान एवं महिला किसानों ने भाग लिया।
Bhagalpur News:मौसम अनुकूल कृषि योजनान्तर्गत ‘प्रशिक्षण-सह-प्रक्षेत्र भ्रमण’ कार्यक्रम का आयोजन
ग्राम समाचार, भागलपुर। जिले के गोराडीह प्रखंड के तरछा गांव में रविवार को मौसम अनुकूल कृषि योजनान्तर्गत किसानों के लिए ‘‘प्रशिक्षण-सह-प्रक्षेत्र भ्रमण’’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ॰ अजय कुमार सिंह, कुलपति बिहार कृषि विश्वविद्यालय, डॉ॰ आर॰के॰ सोहाने निदेशक प्रसार शिक्षा और डॉ॰ आर॰एन॰ सिंह सह निदेशक प्रसार शिक्षा द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। सर्व प्रथम कुलपति निदेशक प्रसार शिक्षा एवं सह निदेशक प्रसार शिक्षा द्वारा दामूचक, लौंगाई एवं तरछा में तकनीकी प्रदर्शन का निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर डॉ॰ विनोद कुमार वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान कृषि विज्ञान केन्द्र सबौर द्वारा उपस्थितियों एवं किसानों का स्वागत किया तथा मौसम अनुकूल कृषि अन्तर्गत चयनित गाँवों यथा गोराडीह प्रखण्ड के दामूचक, तरछा, कासिमपुर, लौंगाई, गोडा एवं सन्हौला प्रखण्ड के सकरामा गाँव में तकनीकी प्रदर्शन की जानकारी दी गई। जानकारी के क्रम में उन्होंने बताया कि खरीफ मौसम में मेढ़ पर मक्के की 15 एकड़, धान की सीधी बुवाई 197.5 एकड़ और लेजर लैंड लेवलर से खेत समतलीकरण 100 एकड़ में किया गया। जल संचयन एवं मेढ़बंदी 78 एकड़ और वैकल्पि सुखा एवं गीला द्वारा धान की खेती 78 एकड़ में किया गया। साथ ही उन्होंने बताया कि रबी मौसम में मेढ़ पर मक्का की बुवाई 150 एकड़, शून्य जुताई से गेहूँ की बुवाई 500 एकड़, मेढ़ पर गेहूँ 50 एकड़, मेढ़ पर मक्का एवं आलू की अन्तर्वर्ती खेती 200 एकड़, शून्य जुताई से मसूर की बुवाई 50 एकड़, शून्य जुताई से चना की बुवाई 50 एकड़, मेढ़ पर सरसों की खेती 75 एकड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसे आप किसान भाईयों के सहयोग से पूरा किया जाएगा। इस अवसर पर किसान अशोक यादव, भगवान यादव, विनय कुमार सिंह, राजेश कुमार, सुनील कुशवाहा ने योजना अनुभवों को को अन्य किसानों के बीच बाँटा। इस अवसर पर डॉ॰ अजय कुमार सिंह, कुलपति, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, डॉ॰ आर॰के॰ सोहाने, निदेशक प्रसार शिक्षा, डॉ॰ आर॰एन॰ सिंह, सह निदेशक प्रसार शिक्षा ने बताया कि विश्वविद्यालय शिक्षण, शोध, प्रसार यथा नवनीनम तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी पत्रिका एवं वीडियों के माध्यम से किसानों को लाभान्वित करने का प्रयास करती रहती है। उन्होंने कहा यह परियोजना युवाओं को कृषि से जोड़ने हेतु प्रोत्साहित करना है। आज युवा कृषि से विमुख हो रहे है एवं रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों एवं देशों की ओर पलायन कर रहे है। उन्हें संसाधन एवं तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराकर कृषि कार्य की ओर प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में आपार संभावनाएँ है। साथ ही उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र एवं बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर सदैव आप किसानों भाईयों के सहयोग के लिए तत्पर है। यदि आपकों कोई समस्या आती है तो आप हमारे पास आये, हम यथासंभव आपकी मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अन्तर्गत मौसम अनुकूल कृषि योजना का संचालन किया जा रहा हैं। इस योजना से किसानों की लागत कम करने, समय की बचत एवं आय में वृद्धि के लिए वैज्ञानिक एवं यांत्रीकरण विधि से खेती की तकनीकी प्रदर्शन कर किसानों को जागरूक किया जाना है। इससे उनके कृषि कार्यों यथा आर्थिक कमी, बाजार की समस्या का निराकरण होगा, साथ ही अच्छी आमदनी भी होगी। उन्होंने कहा जलवायु परिवर्त्तन की समस्या का हर कोई सामना कर रहा है और आने वाले समय यह समस्या और बढ़ता जाएगा। जलवायु परिवर्त्तन का ही परिणाम है कि आज बहुत सारे लोग पानी की समस्या से जुझ रहे है। क्योंकि दिन प्रति दिन जल स्तर नीचे जा रहा है। किसान को आने वाले समय में कृषि में जल की समस्या से जुझना होगा। इसके लिए किसानों को स्मार्ट होना होगा एवं आधुनिक कृषि पद्धति को अपनाना होगा। कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक ई॰ पंकज कुमार एवं शस्य विज्ञान के वैज्ञानिक डॉ॰ अजय कुमार मौर्य द्वारा समसमायिक जानकारी उपलब्ध कराई गई एवं किसानों के साथ चर्चा की गई। इस अवसर पर डॉ॰ आशीष चौरसिया, अल्काज्योति शर्मा, शशि कान्त सहित ‘‘मौसम अनुकूल कृषि योजना’’ के चयनित गाँवों के 280 किसान एवं महिला किसानों ने भाग लिया।


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