ग्राम समाचार न्यूज़ : रेवाड़ी : हरियाणा : नर्सरी से लेकर आठवी तक के बच्चों के स्वास्थ के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और सरकार का इस ओर ध्यान ही नही है। यह कहना है एडवोकेट कैलाश चंद का। उन्होंने कहा कि जिस स्वास्थ की सुरक्षा के लिये सरकार ने लॉक डाउन शुरू किया, उसी लॉक डाउन के पीछे मासूम बच्चो के स्वास्थ के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। मान लिया जाए कि आठवी से ऊपर की कक्षाओं के बच्चें ऑनलाइन शिक्षा से शायद कुछ हासिल कर ले, परन्तु आठवी तक के मासूम बच्चे जिनको शिक्षा सिर्फ और सिर्फ खेल -खेल के तहत दी जानी चाहिये और उनको मोबाईल, कंप्यूटर, ओर इंटरनेट से दूर रखने के साथ साथ, फिजिकल शिक्षा और स्वास्थ्य हेतु मजबूत बनाना चाहिए। सरकार उन्ही बच्चो को निजी स्कूलों के साथ मिलकर ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर इंटरनेट (मोबइल, कम्प्यूटर ) के संसार मे धकेल रहे हैं। अभिभावको को पता ही नही उनके बच्चो के स्वास्थ्य के प्रति सरकार और निजी स्कूल मिलकर उनको बेवकूफ बना रहे हैं।चिकित्सक हमेशा कहते है की छोटे बच्चो को मोबाइल फोन जैसे उपकरणो से दूर रखें वही पर सरकार ओर निजी स्कूल मिलकर फीस वसूलने के मकसद से बच्चो को फोन की गिरफ्त मे धकेलना चाहते है। जो बच्चे स्वयं खाना-पीना तक नही कर सकते, उन बच्चो को ऑनलाइन शिक्षा देने का खेल- खेला जा रहा है। अभिभावकों को बेवकूफ बना कर गुमराह किया जा रहा है की अगर बच्चो को ऑनलाइन शिक्षा नही दी गई तो आपके बच्चे पिछड़ जाएंगे, जबकि इस समय एक अच्छा समय था की बच्चो को रामायण ओर महाभारत जैसे सीरियल के माध्यम से हिंदुस्तान की सभ्यता से अवगत करवाया जा सकता था, परंतु निजी स्कूल और सरकार के आपसी सामंजस्य के कारण बच्चो को ये सब नसीब नही हो सका, क्योकि ऑनलाइन के खेल ने बच्चो ऑर अभिभावकों को उन सीरियल के नजदीक जाने ही नही दिया। इस समय सरकार को और निजी स्कूलो को चाहिए था की बच्चो को संस्कारित बाते सिखाने के लिए अभिभावकों को जागरूक करते। सरकार और निजी स्कूल से पूछना चाहूंगा क्या नर्सरी का बच्चा ऑनलाइन शिक्षा लेने के काबिल है, अगर नही तो फिर ये खेल क्यो खेला जा रहा है, ??? जब ये मासूम बच्चे उन काबिल ही नही है कि ऑनलाइन शिक्षा ले सके, फिर इन बच्चो के की ऑनलाइन शिक्षा के नाम से निजी स्कूलों का मकसद सिर्फ फीस वसूलना है और इससे ज्यादा ओर कुछ नही।
Rewari News : ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर मासूम बच्चो के स्वास्थ के साथ हो रहा खिलवाड़ : कैलाश चंद
ग्राम समाचार न्यूज़ : रेवाड़ी : हरियाणा : नर्सरी से लेकर आठवी तक के बच्चों के स्वास्थ के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और सरकार का इस ओर ध्यान ही नही है। यह कहना है एडवोकेट कैलाश चंद का। उन्होंने कहा कि जिस स्वास्थ की सुरक्षा के लिये सरकार ने लॉक डाउन शुरू किया, उसी लॉक डाउन के पीछे मासूम बच्चो के स्वास्थ के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। मान लिया जाए कि आठवी से ऊपर की कक्षाओं के बच्चें ऑनलाइन शिक्षा से शायद कुछ हासिल कर ले, परन्तु आठवी तक के मासूम बच्चे जिनको शिक्षा सिर्फ और सिर्फ खेल -खेल के तहत दी जानी चाहिये और उनको मोबाईल, कंप्यूटर, ओर इंटरनेट से दूर रखने के साथ साथ, फिजिकल शिक्षा और स्वास्थ्य हेतु मजबूत बनाना चाहिए। सरकार उन्ही बच्चो को निजी स्कूलों के साथ मिलकर ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर इंटरनेट (मोबइल, कम्प्यूटर ) के संसार मे धकेल रहे हैं। अभिभावको को पता ही नही उनके बच्चो के स्वास्थ्य के प्रति सरकार और निजी स्कूल मिलकर उनको बेवकूफ बना रहे हैं।चिकित्सक हमेशा कहते है की छोटे बच्चो को मोबाइल फोन जैसे उपकरणो से दूर रखें वही पर सरकार ओर निजी स्कूल मिलकर फीस वसूलने के मकसद से बच्चो को फोन की गिरफ्त मे धकेलना चाहते है। जो बच्चे स्वयं खाना-पीना तक नही कर सकते, उन बच्चो को ऑनलाइन शिक्षा देने का खेल- खेला जा रहा है। अभिभावकों को बेवकूफ बना कर गुमराह किया जा रहा है की अगर बच्चो को ऑनलाइन शिक्षा नही दी गई तो आपके बच्चे पिछड़ जाएंगे, जबकि इस समय एक अच्छा समय था की बच्चो को रामायण ओर महाभारत जैसे सीरियल के माध्यम से हिंदुस्तान की सभ्यता से अवगत करवाया जा सकता था, परंतु निजी स्कूल और सरकार के आपसी सामंजस्य के कारण बच्चो को ये सब नसीब नही हो सका, क्योकि ऑनलाइन के खेल ने बच्चो ऑर अभिभावकों को उन सीरियल के नजदीक जाने ही नही दिया। इस समय सरकार को और निजी स्कूलो को चाहिए था की बच्चो को संस्कारित बाते सिखाने के लिए अभिभावकों को जागरूक करते। सरकार और निजी स्कूल से पूछना चाहूंगा क्या नर्सरी का बच्चा ऑनलाइन शिक्षा लेने के काबिल है, अगर नही तो फिर ये खेल क्यो खेला जा रहा है, ??? जब ये मासूम बच्चे उन काबिल ही नही है कि ऑनलाइन शिक्षा ले सके, फिर इन बच्चो के की ऑनलाइन शिक्षा के नाम से निजी स्कूलों का मकसद सिर्फ फीस वसूलना है और इससे ज्यादा ओर कुछ नही।

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