ग्राम समाचार पाकुड़, ब्यूरो रिपोर्ट: अमड़ापाड़ा(पाकुड़) प्रखंड क्षेत्र के बासमती गाँव के डंगालपाड़ा में एक व्यक्ति मसरूम की खेती कर आत्मनिर्भर बन रहा हैं। बासमती के डंगालपाड़ा निवासी सुशील पंडित (50वर्ष) बीते तीन माह से अपने निजी आवास में मसरूम (ओएस्टर) की खेती कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि बीते जनवरी माह में रामपुरहाट के निजी रिश्तेदार के घर में मसरूम की खेती का अनुभव प्राप्त हुआ था।जिसके बाद बीते फरवरी महीना से ही मसरूम की खेती की शुरुआत की| उन्होंने अपने निजी आवास के एक रूम में इस प्रक्रिया का प्रारंभ किया|उन्होंने बताया कि मसरूम की खेती में सबसे पहला कार्य पुराने पुआल में बीज डाला जाता हैं|इसके बाद उसकी एक महीना तक देखरेख कर उसकी उपज की जाती हैं| इसके बाद मसरूम के दो सौ ग्राम की पैकेट में पैक किया जाता हैं|अंतिम में मसरूम को बाजार में बेचा जाता हैं. सुशील पंडित के घर मे कुल चार सदस्य हैं| उन्होंने बताया कि मसरूम को खेती करने के लिए जगह की कमी हैं|जगह को कमी होने के कारण मसरूम की खेती में मेहनत ज्यादा और लाभ कम हैं| अगर खेती करने के लिए बड़ी जगह मिल जाए तो उसकी खेती कर खुद को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता हैं|
*मसरूम के अलावा मिट्टी के बर्तन बनाते हैं*
सुशील पंडित मसरूम की खेती के अलावा अपने निजी कार्य को करते हैं. घर में वो मिट्टी के बर्तन बना कर बाजार में बेचने का कार्य भी करते हैं. जिससे वो अपने और अपने परिवार का जीवन यापन करते हैं.
*क्या कहते हैं सुशील पंडित*
सुशील पंडित ने बताया कि मसरूम के खेती पिछले चार महीने से कर रहे हैं. बहुत छोटी जगह होने के कारण उपज ज्यादा नहीं हो पाती हैं. जिससे लाभ नहीं हो पाता हैं।हालांकि घर में खाली समय होने से मसरूम की खेती करने में सक्षम हैं। अगर इस कार्य में कही से आर्थिक मदद मिल जाये तो इस कार्य को बढ़ाया जा सकता हैं।
रंजीत भगत ग्रामसामाचार
अमड़ापाड़ा(पाकुड़)


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