ग्राम समाचार जामताड़ा।
किसी ने मोबाइल बेचा तो किसी ने घड़ी-अंगूठी। इसके छह दिन बाद भी बिहार के मोतिहारी जिला स्थित अपने घर नहीं पहुंच पाए हैं। यात्रा का यह दर्द रविवार दोपहर आंध्रपदेश से मोतिहारी पैदल जा रहे करीब 40 प्रवासी मजदूरों का है। उसने अपनी आपबीती ग्राम समाचार को बतायी। उनकी व्यथा से अनुमंडल पदाधिकारी को ग्राम समाचार ने अवगत कराया तो वे उपायुक्त से वार्ता कर स्वयं स्टेशन रोड पहुंचे और सभी प्रवासी को क्वारंटाइन केंद्र ले गये। भोजन कराया सबों को देर शाम को वाहन के माध्यम से बिहार के मोतिहारी के समीप झारखंड सीमा तक पहुंचा गया। जत्था में शामिल तीन बच्चे के एक पिता की पीड़ा थी कि वे अपनी पत्नी को मुखाग्नि भी नहीं दे पाए। कहा कि जीवन भर इसका दुख उन्हें रहेगा। बिहार के मोतिहारी जिला स्थित जयसनपुर महेसड़ा गांव व उसके आस-पास करीब 40 व्यक्ति आंध्र प्रदेश के श्यामलकोटा स्थित बेदापुरम में गुलकोज फैक्ट्री में मजदूरी का काम करते थे। सभी मजदूर अपने गांव के अंगद साहनी के कहने पर काम पर गये थे। कोई सात माह तो कोई पांच माह से वहां थे। लॉकडाउन में फैक्ट्री में मजदूरों से एक माह तक काम करवाता रहा। लॉकडाउन की अवधि बढ़ी तो मालिक ने मजदूरों पर घर वापसी को दबाव बनाया। मजदूरों को बकाया पारिश्रमिक राशि का भी भुगतान नहीं किया गया। मजदूर तंग आकर लॉक डाउन से मिले छूट का लाभ उठाते हुए 12 अप्रैल को आंध्रप्रदेश स्थित श्यामल कोटा से पैदल बिशाखापतनम पहुंचे।
फिर ट्रक से ओडिशा पहुंो। इसके बाद बंगाल होकर जामताड़ा पैदल रविवार को गुजर रहे थे। 35 वर्षीय अंगद साहिनी काफी व्यथित थे। के आंख से आंसू बंद होने का नाम नहीं ले रहा है। साहिनी ने बताया कि लॉक डाउन में 11 व 12 अप्रैल को पत्नी का फोन आया और बताया की सास के साथ उसका विवाद चल रहा है। संभव हो तो आ जाएं। फैक्ट्री संचालक से आग्रह किया लेकिन घर जाने की अनुमति नहीं मिली। घर में पहुंची मेरी साली के बहकावे में 15 अप्रैल रात को पत्नी ने फांसी लगाकर आत्म हत्या कर ली। 16 अप्रैल को घटना की जानकारी मिली पर घर जाने का कोई विकल्प नहीं था। अब बंगाल से पैदल जामताड़ा पहुंचे हैं। घर में रहते तो पत्नी व मां के विवाद को सुलझा लेता और पत्नी का साथ जीवन में नहीं छूटता। दूसरे पीड़ित प्रवासी मोतिहारी जिले स्थित जयसनपुर महेसड़ा निवासी 50 वर्षीय महेश साहनी थे। वे अपने दो पुत्रों से मिलने के लिए मार्च माह में आंध्रप्रदेश स्थित ग्लुकोज फैक्ट्री पहुंचे थे। पुत्र हरिओम कुमार व राधेश्याम कुमार के कहने पर पिता महेश साहनी पगार मिलने तक वहीं रुक गये। इस बीच लॉकडाउन की घोषणा हुई। तो बेटा के साथ पिता को भी मजदूरी करनी पड़ी। काम के एवज में केवल खोराकी खर्च मिलता था। महेश ने बताया की बेटा के लंबित पारिश्रमिक राशि भी मालिक ने नहीं दी। अब पिता दोनों पुत्र के साथ पैदल घर औट रहे हैं। इसके पूर्व रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे स्टेशन रोड से 40 प्रवासियों का जत्था पैदल गुजर रहा था। अधिकांश प्रवासियों के माथे पर बोरा-थैला लदा था। हाथ में पानी बोतल तो किसी के हाथ में बिस्कुट व मूढ़ी का पैकेट था।
वर्जन : ग्राम समाचार की सूचना पर उपायुक्त को मामले से अवगत कराया गया। प्रवासियों को भोजन कराया गया। जाुंच कराई गई। सभी प्रवासियों को मोतिहारी के समीप झारखंड सीमा तक पहुंचाने की तैयारी पूरी की जा रही है। देर शाम को बस से उन्हें भेजा जाएगा। खुद मजदूरों को लाकर क्वारंटाइन केंद्र तक पहुंचाए। में भेजा। सुधीर कुमार,एसडीओ।
अरविंद ओझा, ग्राम समाचार, जामताड़ा
किसी ने मोबाइल बेचा तो किसी ने घड़ी-अंगूठी। इसके छह दिन बाद भी बिहार के मोतिहारी जिला स्थित अपने घर नहीं पहुंच पाए हैं। यात्रा का यह दर्द रविवार दोपहर आंध्रपदेश से मोतिहारी पैदल जा रहे करीब 40 प्रवासी मजदूरों का है। उसने अपनी आपबीती ग्राम समाचार को बतायी। उनकी व्यथा से अनुमंडल पदाधिकारी को ग्राम समाचार ने अवगत कराया तो वे उपायुक्त से वार्ता कर स्वयं स्टेशन रोड पहुंचे और सभी प्रवासी को क्वारंटाइन केंद्र ले गये। भोजन कराया सबों को देर शाम को वाहन के माध्यम से बिहार के मोतिहारी के समीप झारखंड सीमा तक पहुंचा गया। जत्था में शामिल तीन बच्चे के एक पिता की पीड़ा थी कि वे अपनी पत्नी को मुखाग्नि भी नहीं दे पाए। कहा कि जीवन भर इसका दुख उन्हें रहेगा। बिहार के मोतिहारी जिला स्थित जयसनपुर महेसड़ा गांव व उसके आस-पास करीब 40 व्यक्ति आंध्र प्रदेश के श्यामलकोटा स्थित बेदापुरम में गुलकोज फैक्ट्री में मजदूरी का काम करते थे। सभी मजदूर अपने गांव के अंगद साहनी के कहने पर काम पर गये थे। कोई सात माह तो कोई पांच माह से वहां थे। लॉकडाउन में फैक्ट्री में मजदूरों से एक माह तक काम करवाता रहा। लॉकडाउन की अवधि बढ़ी तो मालिक ने मजदूरों पर घर वापसी को दबाव बनाया। मजदूरों को बकाया पारिश्रमिक राशि का भी भुगतान नहीं किया गया। मजदूर तंग आकर लॉक डाउन से मिले छूट का लाभ उठाते हुए 12 अप्रैल को आंध्रप्रदेश स्थित श्यामल कोटा से पैदल बिशाखापतनम पहुंचे।
वर्जन : ग्राम समाचार की सूचना पर उपायुक्त को मामले से अवगत कराया गया। प्रवासियों को भोजन कराया गया। जाुंच कराई गई। सभी प्रवासियों को मोतिहारी के समीप झारखंड सीमा तक पहुंचाने की तैयारी पूरी की जा रही है। देर शाम को बस से उन्हें भेजा जाएगा। खुद मजदूरों को लाकर क्वारंटाइन केंद्र तक पहुंचाए। में भेजा। सुधीर कुमार,एसडीओ।
अरविंद ओझा, ग्राम समाचार, जामताड़ा


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