ग्राम समाचार, भागलपुर । स्टेट बैंक के भागलपुर आंचलिक कार्यालय के पूर्णिया आंचलिक कार्यालय में विलय के विरोध में भागलपुर के व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और प्रबुद्ध नागरिकों की बैठक नयाबाज़ार स्थित इस्टर्न बिहार इण्डस्ट्रीज़ एसोसिएशन कार्यालय में हुई। अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्त्ता प्रकाश चन्द्र गुप्ता ने की।
विषय प्रवेश करते हुए इस्टर्न बिहार इण्डस्ट्रीज़ एसोसिएशन के महासचिव आलोक अग्रवाल ने कहा कि यह बहुत क्षोभ का विषय है कि भागलपुर जैसे ऐतिहासिक प्रक्षेत्र में नयी सुविधाएं तो आ नहीं रही, जो हैं उन्हें भी छीना जा रहा है। भागलपुर का व्यावसायिक ग्राफ हरेक क्षेत्र में हरेक दृष्टिकोण से आगे है। इसलिए इस निर्णय का हरेक फ्रंट पर विरोध जताना ज़रुरी है। बैंक के इस कदम का सभी नागरिकों, संस्थाओं एवं संगठनों को एकजुट होकर सड़क से संसद तक विरोध करना चाहिए। आरटीआई कार्यकर्त्ता अजित सिंह ने कहा कि यह कुछ अधिकारियों का कुत्सित प्रयास है। दिशा ग्रामीण विकास मंच के मनोज पाण्डेय ने कहा की भागलपुर के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण भागलपुर में डीआरएम कार्यालय, केन्द्रीय विश्वविद्यालय, एम्स आदि नहीं खुल पाए। जिला विधिक संघ के अध्यक्ष अभयकान्त झा ने कहा कि भागलपुर में पिछले 39 वर्षों से स्थापित आंचलिक कार्यालय से भागलपुर के सभी क्षेत्र के लोगों को सरोकार रहता है। इसे यूँ ही ख़त्म नहीं करने दिया जा सकता है। जरुरत पड़ी तो इसके लिए कानूनी लडाई भी लड़ी जायेगी। चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अशोक भिवानिवाला ने कहा कि शहर की गरिमा और वाणिज्यिक महत्व को देखते हुए ऐसे किसी भी प्रयास का विरोध हर स्तर पर आवश्यक है।
इस्टर्न बिहार इण्डस्ट्रीज़ एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविन्द अग्रवाल ने कहा कि एकतरफ भागलपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की बात हो रही है, दूसरी तरफ यहाँ मौजूद सुविधाओं में कटौती की जा रही है। चेम्बर ऑफ कॉमर्स के महासचिव रोहित झुनझुनवाला ने कहा कि भागलपुर में व्यापार और शिक्षा के प्रसार के लिए स्टेट बैंक के आंचलिक कार्यालय का रहना अति आवश्यक है। इण्डस्ट्रीज़ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुनील साह ने आंचलिक कार्यालय को ख़त्म करने के कदम को भागलपुर की अस्मिता से खिलवाड़ बताया। सामाजिक कार्यकर्त्ता निशु सिंह ने कहा कि अगर इस कदम को नहीं रोका गया तो कल शहर से और सुविधाएं भी छिनी जायेंगी। दीपक सुल्तानिया और अभिषेक जैन ने भी ऐसे किसी कदम का विरोध किया। सामाजिक कार्यकर्ता अमिता कौशिक ने कहा कि भागलपुर के साथ किसी प्रकार के सौतेले व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
अध्यक्षीय भाषण में प्रकाश चन्द्र गुप्ता ने पूर्व में भी बैंक प्रबंधन द्वारा किये गए कुत्सित प्रयासों का हवाला दिया और कहा कि सभी नागरिकों और संस्थाओं की सहायता से एक पुरजोर विरोध किया जाएगा। भागलपुर सभी दृष्टि में पूर्णिया से अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए अगर आंचलिक कार्यालयों की संख्या कम करनी है तो पूर्णिया कार्यालय का विलय भागलपुर आंचलिक कार्यालय में हो।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रथम चरण में प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, वित्त सचिव, बैंक के उच्च पदाधिकारियों को पत्र लिखकर इस विलय का विरोध दर्ज कराया जायेगा। शहर से जुड़े सभी जनप्रतिनिधियों को इस प्रयास से अवगत कराते हुए उनपर इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाने का दबाव बनाया जायेगा। शीघ्र ही शहर के अन्य संस्थाओं एवं संगठनों को भी इस मुहिम में जोड़कर धरना-प्रदर्शन का आयोजन होगा और जरुरत पड़ी तो भागलपुर बंद का आह्वान किया जायेगा।
विषय प्रवेश करते हुए इस्टर्न बिहार इण्डस्ट्रीज़ एसोसिएशन के महासचिव आलोक अग्रवाल ने कहा कि यह बहुत क्षोभ का विषय है कि भागलपुर जैसे ऐतिहासिक प्रक्षेत्र में नयी सुविधाएं तो आ नहीं रही, जो हैं उन्हें भी छीना जा रहा है। भागलपुर का व्यावसायिक ग्राफ हरेक क्षेत्र में हरेक दृष्टिकोण से आगे है। इसलिए इस निर्णय का हरेक फ्रंट पर विरोध जताना ज़रुरी है। बैंक के इस कदम का सभी नागरिकों, संस्थाओं एवं संगठनों को एकजुट होकर सड़क से संसद तक विरोध करना चाहिए। आरटीआई कार्यकर्त्ता अजित सिंह ने कहा कि यह कुछ अधिकारियों का कुत्सित प्रयास है। दिशा ग्रामीण विकास मंच के मनोज पाण्डेय ने कहा की भागलपुर के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण भागलपुर में डीआरएम कार्यालय, केन्द्रीय विश्वविद्यालय, एम्स आदि नहीं खुल पाए। जिला विधिक संघ के अध्यक्ष अभयकान्त झा ने कहा कि भागलपुर में पिछले 39 वर्षों से स्थापित आंचलिक कार्यालय से भागलपुर के सभी क्षेत्र के लोगों को सरोकार रहता है। इसे यूँ ही ख़त्म नहीं करने दिया जा सकता है। जरुरत पड़ी तो इसके लिए कानूनी लडाई भी लड़ी जायेगी। चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अशोक भिवानिवाला ने कहा कि शहर की गरिमा और वाणिज्यिक महत्व को देखते हुए ऐसे किसी भी प्रयास का विरोध हर स्तर पर आवश्यक है।
इस्टर्न बिहार इण्डस्ट्रीज़ एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविन्द अग्रवाल ने कहा कि एकतरफ भागलपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की बात हो रही है, दूसरी तरफ यहाँ मौजूद सुविधाओं में कटौती की जा रही है। चेम्बर ऑफ कॉमर्स के महासचिव रोहित झुनझुनवाला ने कहा कि भागलपुर में व्यापार और शिक्षा के प्रसार के लिए स्टेट बैंक के आंचलिक कार्यालय का रहना अति आवश्यक है। इण्डस्ट्रीज़ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुनील साह ने आंचलिक कार्यालय को ख़त्म करने के कदम को भागलपुर की अस्मिता से खिलवाड़ बताया। सामाजिक कार्यकर्त्ता निशु सिंह ने कहा कि अगर इस कदम को नहीं रोका गया तो कल शहर से और सुविधाएं भी छिनी जायेंगी। दीपक सुल्तानिया और अभिषेक जैन ने भी ऐसे किसी कदम का विरोध किया। सामाजिक कार्यकर्ता अमिता कौशिक ने कहा कि भागलपुर के साथ किसी प्रकार के सौतेले व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
अध्यक्षीय भाषण में प्रकाश चन्द्र गुप्ता ने पूर्व में भी बैंक प्रबंधन द्वारा किये गए कुत्सित प्रयासों का हवाला दिया और कहा कि सभी नागरिकों और संस्थाओं की सहायता से एक पुरजोर विरोध किया जाएगा। भागलपुर सभी दृष्टि में पूर्णिया से अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए अगर आंचलिक कार्यालयों की संख्या कम करनी है तो पूर्णिया कार्यालय का विलय भागलपुर आंचलिक कार्यालय में हो।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रथम चरण में प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, वित्त सचिव, बैंक के उच्च पदाधिकारियों को पत्र लिखकर इस विलय का विरोध दर्ज कराया जायेगा। शहर से जुड़े सभी जनप्रतिनिधियों को इस प्रयास से अवगत कराते हुए उनपर इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाने का दबाव बनाया जायेगा। शीघ्र ही शहर के अन्य संस्थाओं एवं संगठनों को भी इस मुहिम में जोड़कर धरना-प्रदर्शन का आयोजन होगा और जरुरत पड़ी तो भागलपुर बंद का आह्वान किया जायेगा।
- बिजय शंकर, ग्राम समाचार भागलपुर।
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