ग्राम समाचार, बौंसी, बांका। बौंसी क्षेत्र के कैरी शरीफ में लगने वाला दो दिवसीय उर्स मेला काफी शानोशौकत से मनाया गया। इस बार हर साल से ज्यादा भीड़ देखने को मिली।
अब्दुल रहमान शाह बाबा के पाक दरगाह पर लगने वाला उर्स हिन्दू और मुसलमानों के भाईचारे के रूप में जाना जाता हैं। यहां पर हर साल 20 जनवरी और 21 जनवरी को दो दिवसीय उर्स आयोजित किया जाता है
जिसमें भारत के कोने कोने से लोग आते है।लोगों को यह विश्वास है कि अब्दुल रहमान शाह बाबा के दरबार में जो भी व्यक्ति सच्चे मन से सिर झुकाता है उस पर बाबा की कृपा होती है और सब की झोलियां वहां भरी जाती है।
वहां के खादिम मोहम्मद मोसिम शेख ओर मोहम्मद मुर्तजा शेख ने खास बातचीत में बताया कि यहां बाबा के दरगाह पर लोग भले ही रोते हुए आते हो पर हंसते हुए वह जाते हैं यहां हर प्रकार की रूहानी इलाज को किया जाता है और जिनकी भी मनोकामना पूरी होती है वह खुशी-खुशी यहां जियारत पर आते हैं
चूंकी इस बार भीड़ काफी ज्यादा थी इसलिए लगभग 7:00 बजे से ही बाबा के मजार पर चादर पोशी शुरू हो गई जो देर रात तक चलती रही उसके बाद रात में नातिया कलाम का कार्यक्रम शुरू हुआ जो सुबह तक चला। नातिया कलाम के लिए कोलकाता, नागपुर, भागलपुर और देश के कोने कोने से लोग आए हुए थे।
इस बार मेले में बच्चों और नवयुवकों के लिए मनोरंजन के अनेक साधन देखने को मिलें। पिछले वर्ष से ज्यादा इस वर्ष झूले और तारामांची आए हुए थे। जिनका बच्चों ने इस मेले में पूरा आनंद उठाया। वहीं दूसरी और खाने-पीने और व्यंजन के अनेक साधन थे जहां हलवा पूरी और मुगलिया पराठा को काफी पसंद किया जा रहा था और दुकानों में पूरी भीड़ देखी गई। हालांकि इस बार ठंड काफी थी इसलिए उर्स समिति के द्वारा मेले में आए हुए लोगों के लिए ठंड से बचने के लिए हर तरह की व्यवस्था की गई थी जगह-जगह लोगों को ठहरने के लिए पंडाल बनाए गए थे और आलाव की व्यवस्था की गई थी।
कुल मिलाकर यह देखा जाए तो मेले में दूर-दूर से आए हुए लोगों की देखभाल के लिए 200 से भी ज्यादा वॉलिंटियर थे जो रात भर निगरानी कर रहे थे।मेले की देखरेख मोहम्मद शकील, मोहम्मद सकीम, मोहम्मद मोकीम, मोहम्मद फखरुद्दीन, मोहम्मद इसराइल, मोहम्मद कासिम आदि कर रहे थे।
अब्दुल रहमान शाह बाबा के पाक दरगाह पर लगने वाला उर्स हिन्दू और मुसलमानों के भाईचारे के रूप में जाना जाता हैं। यहां पर हर साल 20 जनवरी और 21 जनवरी को दो दिवसीय उर्स आयोजित किया जाता है
जिसमें भारत के कोने कोने से लोग आते है।लोगों को यह विश्वास है कि अब्दुल रहमान शाह बाबा के दरबार में जो भी व्यक्ति सच्चे मन से सिर झुकाता है उस पर बाबा की कृपा होती है और सब की झोलियां वहां भरी जाती है।
वहां के खादिम मोहम्मद मोसिम शेख ओर मोहम्मद मुर्तजा शेख ने खास बातचीत में बताया कि यहां बाबा के दरगाह पर लोग भले ही रोते हुए आते हो पर हंसते हुए वह जाते हैं यहां हर प्रकार की रूहानी इलाज को किया जाता है और जिनकी भी मनोकामना पूरी होती है वह खुशी-खुशी यहां जियारत पर आते हैं
चूंकी इस बार भीड़ काफी ज्यादा थी इसलिए लगभग 7:00 बजे से ही बाबा के मजार पर चादर पोशी शुरू हो गई जो देर रात तक चलती रही उसके बाद रात में नातिया कलाम का कार्यक्रम शुरू हुआ जो सुबह तक चला। नातिया कलाम के लिए कोलकाता, नागपुर, भागलपुर और देश के कोने कोने से लोग आए हुए थे।
इस बार मेले में बच्चों और नवयुवकों के लिए मनोरंजन के अनेक साधन देखने को मिलें। पिछले वर्ष से ज्यादा इस वर्ष झूले और तारामांची आए हुए थे। जिनका बच्चों ने इस मेले में पूरा आनंद उठाया। वहीं दूसरी और खाने-पीने और व्यंजन के अनेक साधन थे जहां हलवा पूरी और मुगलिया पराठा को काफी पसंद किया जा रहा था और दुकानों में पूरी भीड़ देखी गई। हालांकि इस बार ठंड काफी थी इसलिए उर्स समिति के द्वारा मेले में आए हुए लोगों के लिए ठंड से बचने के लिए हर तरह की व्यवस्था की गई थी जगह-जगह लोगों को ठहरने के लिए पंडाल बनाए गए थे और आलाव की व्यवस्था की गई थी।
कुल मिलाकर यह देखा जाए तो मेले में दूर-दूर से आए हुए लोगों की देखभाल के लिए 200 से भी ज्यादा वॉलिंटियर थे जो रात भर निगरानी कर रहे थे।मेले की देखरेख मोहम्मद शकील, मोहम्मद सकीम, मोहम्मद मोकीम, मोहम्मद फखरुद्दीन, मोहम्मद इसराइल, मोहम्मद कासिम आदि कर रहे थे।






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