इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) रेवाड़ी एवं भारत विकास परिषद श्रीराम शाखा के संयुक्त तत्वावधान में झज्जर रोड स्थित आशियाना वृद्धाश्रम (बाबा फरीद सेवा ट्रस्ट) में ‘सेवा एवं मुस्कान—बुजुर्गों के साथ एक दिन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों के साथ समय बिताना, उनकी भावनाओं को समझना, उनकी आवश्यकताओं में सहयोग करना तथा उन्हें परिवार जैसा अपनापन और सम्मान प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान आईएमए रेवाड़ी, भारत विकास परिषद तथा समाज के सदस्यों ने वृद्धाश्रम के बुजुर्गों के साथ आत्मीयता से समय बिताया। सदस्यों ने उनके बचपन और जीवन से जुड़ी यादें सुनीं, उनके अनुभवों को जाना तथा गीत-संगीत, कविता, मनोरंजक खेलों और सामूहिक बातचीत के माध्यम से उनके साथ खुशियां साझा कीं। परिवार के सदस्यों एवं बच्चों की सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक भावनात्मक एवं यादगार बना दिया।
‘आशा वृक्ष’ के माध्यम से जुड़ीं भावनाएं
कार्यक्रम के अंतर्गत ‘आशा वृक्ष’ की विशेष पहल की गई। इसमें वृद्धाश्रम के बुजुर्गों ने अपनी इच्छाएं, सपने, यादें और मन की बातें कागज की पत्तियों पर लिखकर साझा कीं। उपस्थित सदस्यों ने उनकी इच्छाओं को यथासंभव पूरा करने तथा आने वाले समय में उनके साथ निरंतर जुड़े रहने का संकल्प लिया।
इसके साथ ही वृद्धाश्रम परिसर में औषधीय एवं रसोई उद्यान विकसित करने की पहल की गई। इसमें तुलसी, घृतकुमारी, पुदीना, लेमनग्रास, धनिया, पालक, मेथी, मिर्च सहित विभिन्न उपयोगी एवं मौशमी पौधे लगाएं गए.
आवश्यक वस्तुओं के साथ बांटा स्नेह
बुजुर्गों की सुविधा एवं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए फल, चादर, तौलिए, दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं तथा अन्य जरूरत का सामान वितरित किया गया। चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य एवं स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में संक्षिप्त जागरूकता संवाद भी किया गया।
आईएमए रेवाड़ी की मुख्य संरक्षक डॉ. नीलम यादव ने बुजुर्गों को विटामिन एवं आवश्यक दवाइयां वितरित कीं। डॉक्टर कविता यादव ने दैनिक उपयोग की वस्तुएं, डॉ. कंचन यादव ने आवश्यक सामग्री, नमिता यादव ने तौलिए तथा कमला यादव ने सभी बुजुर्गों को चादरें भेंट कीं। ऋतु ओबालों ने भी बुजुर्गों को आवश्यक दैनिक उपयोग की वस्तुएं वितरित कीं और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के दौरान केक काटकर जन्मदिन भी मनाया गया। बुजुर्गों ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया. इस अवसर पर आईएमए रेवाड़ी की अध्यक्ष डॉ. नीरज यादव ने कहा,
“हम आज यहां केवल वस्तुएं देने नहीं आए हैं, बल्कि अपना समय, अपनापन और प्रेम साझा करने आए हैं। इन बुजुर्गों के साथ कुछ समय बिताकर हमें उनसे कहीं अधिक मिला है। उनकी बातें, उनके जीवन के अनुभव और कठिन परिस्थितियों में भी प्रसन्न रहने का उनका जज़्बा हमें बहुत कुछ सिखाता है।”
*उन्होंने कहा कि बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं और उनके अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन की पाठशाला हैं। आज की व्यस्त जीवनशैली में यदि हम उन्हें थोड़ा समय, सम्मान और स्नेह दे सकें तथा उन्हें यह एहसास करा सकें कि “आप हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं
कार्यक्रम का संचालन ऋतु बैर ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सहज एवं आत्मीय अंदाज में संचालित करते हुए सभी बुजुर्गों को विभिन्न गतिविधियों में शामिल किया तथा उन्हें हंसाया-गुदगुदाया। उन्होंने बुजुर्गों से बातचीत कर उनका उत्साह बढ़ाया और आवश्यक वस्तुओं का वितरण भी किया। उनके सक्रिय सहयोग से पूरे कार्यक्रम में आत्मीयता और उत्साह का वातावरण बना रहा।
इस अवसर पर सी ए निधि गौतम, सी ए जतिन सैनी, डॉ. प्रशांत यादव, महासचिव, डॉ. पूजा अनेजा सहित आईएमए रेवाड़ी, भारत विकास परिषद एवं समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने बुजुर्गों के साथ समय बिताया, उनकी बातें सुनीं तथा भविष्य में भी उनके साथ निरंतर संपर्क एवं सहयोग बनाए रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. पूजा अनेजा ने सभी उपस्थित सदस्यों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम केवल सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता, अपनापन और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने का अवसर हैं। उन्होंने सभी सदस्यों को भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा, “किसी के साथ बिताई गई एक शाम हमारे लिए भले ही कुछ घंटों की बात हो, लेकिन किसी अकेले व्यक्ति के लिए वही कुछ घंटे जीवन की एक खूबसूरत याद बन सकते हैं।”
कार्यक्रम में स्मृति चित्रण स्थल भी आकर्षण का केंद्र रहा, जहां बुजुर्गों एवं सदस्यों ने साथ तस्वीरें खिंचवाकर इन सुखद पलों को यादों में संजोया।
इस अवसर ने यह संदेश दिया कि—
“सेवा केवल किसी को वस्तु देने का नाम नहीं है। सेवा है किसी का हाथ थामना, उसकी बात सुनना, उसके साथ मुस्कुराना और उसे अपनेपन का एहसास कराना।”
“हम साथ मिलकर केवल सेवा नहीं करते, हम साथ मिलकर मुस्कानें बांटते हैं।”
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सेवा और मुस्कान की यह पहल केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बुजुर्गों के साथ निरंतर जुड़ाव, सम्मान, स्नेह और सहयोग के रूप में आगे भी जारी रहेगी।







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