एमडी ऑफ इंडिया, रेवाड़ी की टीम ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, रेवाड़ी के साथ मिलकर शहर में बाल श्रम के खिलाफ सामूहिक छापेमारी अभियान चलाया। इस अभियान में मानव तस्करी विरोधी इकाई से *ASI रश्मि, ASI प्रवीन और कॉन्स्टेबल सुनील* मौजूद रहे। एमडी ऑफ इंडिया से *तुषार शर्मा, असिस्टेंट कोऑर्डिनेटर* भी टीम में शामिल थे। सभी ने मिलकर रेवाड़ी शहर के विभिन्न होटलों, ढाबों और दुकानों पर रेड की। अभियान के दौरान वहां से कई नाबालिग बच्चों को श्रम करते हुए रेस्क्यू किया गया। सभी बच्चे बहुत कम उम्र के थे और शोषणकारी परिस्थितियों में काम कर रहे थे।
रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को सामूहिक रूप से रेवाड़ी बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए *सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष श्रीमती श्रुति शर्मा*, सदस्य नीतू चौधरी, एकता रानी व बलजीत सिंह ने बच्चों के माता-पिता और होटल मालिकों को सख्त निर्देश दिए। उन्हें बताया गया कि भविष्य में यदि बाल श्रम पाया गया तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बच्चों के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए बाल संरक्षण अधिकारी दीपिका के समक्ष उचित काउंसलिंग करवाने के बाद सभी बच्चों को लिखित कार्यवाही करवा कर उनके माता-पिता को सौंप दिया गया। यह अभियान रेवाड़ी को बाल श्रम मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाया गया। एमडी ऑफ इंडिया, रेवाड़ी के असिस्टेंट कोऑर्डिनेटर तुषार शर्मा ने बताया कि बाल श्रम एक दंडनीय अपराध है। किसी भी व्यक्ति द्वारा 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे से काम कराना या 14 से 18 वर्ष के बच्चों को खतरनाक कार्यों में लगाना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में एक से छह महीने तक की सजा या 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि कहीं भी बाल श्रम से जुड़ा कोई मामला दिखाई दे, तो तुरंत श्रम विभाग, मानव तस्करी विरोधी इकाई, बाल कल्याण समिति या जिला प्रशासन को सूचना दें, ताकि बच्चों का बचपन सुरक्षित किया जा सके।

0 comments:
एक टिप्पणी भेजें