रेवाड़ी क़े हरिनगर स्थित श्री बालाजी धाम में आयोजित 21 दिवसीय पंच धूणा तपस्या का सोमवार को समापन हो गया। तपस्या क़े समापन उपलक्ष में आज मंगलवार को हवन व भंडारे का आयोजन किया गया। प्रातः हवन का आयोजन कर दोपहर को भंडारे क़े प्रसाद का आयोजन किया गया।
मंदिर क़े महंत पागल गुरु के सानिध्य में भक्तों ने हवन आहुति अर्पित की। महंत पागल गुरु के सानिध्य में 21 दिन तपस्या करने वाले शिष्यों ने गुरु पूजन किया और फूल माला पहनाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर क़े महंत पागल गुरु ने कहा कि सनातन संस्कृति में तप का अलग महत्व है। इसका उद्देश्य इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण और आंतरिक ऊर्जा जागृत करना होता है। विश्व कल्याण एवं मंगलकामना क़े उदेश्य से यह तप की गई.
इस तप को मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक साधना का चरम माना जाता है। उन्होंने कहा कि हम भक्ति क़े लिए मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा आदि जाते हैं असली भक्ति तो अपने घर पर ही है माता-पिता की सेवा करना ही सच्ची भक्ति है उन्होंने आडंबर अंधविश्वास आदि से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि अपने माता पिता गुरुजनों का आदर करों अच्छे कर्म करो क्योंकि हमारे द्वारा किए गए कर्म क़े आधार पर ही विधाता फल देता है।
इस मौके पर काली माता मंदिर संत फकीर धाम सराय बलभद्र कमेटी क़े सदस्यो क़े साथ पहुंचे महंत अभय सिंह गिरी महाराज ने भी अपना संदेश दिया और दोनों मंदिरों में चल रही धूना तपस्या के बारे में जानकारी दी। मंदिर से जुड़े भक्तगणों ने मंदिर में ध्वजा अर्पित की। गोगामेड़ी से आई भजन मंडली ने मंदिर परिसर में दिन व रात्रि जागरण का आयोजन किया।
इस आयोजन में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भंडारा प्रसाद ग्रहण किया व महाराज के दर्शन किए व आशीर्वाद प्राप्त किया।





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