ग्राम समाचार, बोआरीजोर। गोड्डा जिला के राजमहल परियोजना क्षेत्र अंतर्गत ललमटिया कोयला खदान में स्थापित RO वॉटर प्लांट इन दिनों अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। बीते करीब चार महीनों से प्लांट पूरी तरह बंद पड़ा है और मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ है। जिस प्लांट को ECL द्वारा विस्थापित गांवों और आसपास के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था, वही अब महज शोभा की वस्तु बनकर रह गया है।
गर्मी ने दस्तक दे दी है और ऐसे समय में पानी की जरूरत सबसे अधिक होती है। लेकिन विडंबना यह है कि इसी समय यह RO प्लांट ठप पड़ा है, जो सीधे तौर पर ECL प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह समस्या हर साल दोहराई जाती है RO वॉटर प्लांट खराब होता है और महीनों तक बंद रहता है। इस बार तो स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि चार महीनों से लगातार सेवा बाधित है।
शुद्ध पानी के लिए लोग दर-दर भटकने को मजबूर हैं। जिन लोगों के लिए मुफ्त या सुलभ शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई थी, उन्हें अब मजबूरी में निजी वाटर प्लांट से महंगा पानी खरीदना पड़ रहा है। यह स्थिति आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है और सरकार या कम्पनी के वादों की सच्चाई भी सामने ला रही है।
हालांकि, मामले को लेकर राजमहल एरिया ECL के सिविल अधिकारी दिलीप मालिक का कहना है कि समस्या उनके संज्ञान में है। कोलकाता से एक्सपर्ट आकर जांच कर चुके हैं और जल्द ही प्लांट को दुरुस्त कर चालू करने का आश्वासन दिया गया है।
अब सवाल यह उठता है कि “जल ही जीवन है” के दौर में क्या ऐसी बुनियादी सुविधाओं को भी इसी तरह अनदेखा किया जाएगा? क्या ECL प्रबंधन इस समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाएगा या हर साल की तरह यह मुद्दा फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा? स्थानीय लोगों की निगाहें अब ECL प्रबंधन पर टिकी हैं कि आखिर कब तक प्यासे विस्थापित गांवों को राहत मिलेगी।

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