13 कुमाऊँ बटालियन को शुर वीरों में अति शूर वीर उपाधि जलूराह ऑपरेशन रक्षक के नायक सूबेदार सज्जन सिंह यादव 'अशोक चक्र' के सर्वोच्च बलिदान की देन है।
भारतीय सेना की गिनी चुनी बटालियन के पास ही शूर वीरों में अति शूर वीर की उपाधि है। जिस बटालियन के पास युद्ध अथवा किसी ऑपरेशन में वीरता के दो सर्वोच्च अवार्ड परम वीर चक्र या अशोक चक्र प्राप्त हो जाते हैं उसे शूर वीरों में अति शूर वीर की उपाधि प्रदान की जाती है। 18 नवंबर 1962 को भारत चीन युद्ध के दौरान रेजांगला पोस्ट की रक्षा करते हुए 13 कुमाऊँ बटालियन की सी कम्पनी के अद्वितीय पराक्रम की बदौलत कम्पनी कमांडर मेजर शैतान सिंह भाटी को परम वीर चक्र मरणोपरांत प्रदान किया गया। बटालियन को आप्रेशन रक्षक के दौरान जलूराह (कुपवाड़ा) में 26 सितंबर 1994 को पांच खूंखार आतंकवादियों को मौत के घाट उतार कर अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सूबेदार सज्जन सिंह यादव को सर्वोच्च वीरता पदक अशोक चक्र का अवार्ड मरणोपरांत प्रदान किया गया। रेजांगला युद्ध में मोर्चे पर 124 जवानों की अहीर कम्पनी ने 1300 से अधिक चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार कर 110 ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। जलूराह मुठभेड़ में सूबेदार सज्जन सिंह यादव के नेतृत्व में 10 अहीर रणबांकुरों ने अपना सर्वोच्च बलिदान देकर पांच खूंखार आतंकवादियों का सफाया किया। इन दोनों सर्वोच्च वीरता पदक की बदौलत ही 13 कुमाऊँ पलटन को 1995 में 'शूर वीरों में अति शूर वीर' वीर-अहीर की प्रतिष्ठित उपाधि प्राप्त हुई। समारोह संचालक कप्तान चंदन सिंह यादव ने बताया कि 26 सितंबर को हर वर्ष अशोक चक्र सूबेदार सज्जन सिंह यादव के गांव कनीना में जलूराह शौर्य समिति एक भव्य शौर्य दिवस समारोह का आयोजन करती है जिसमें बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों को सम्मानित किया जाता है। इस बार मेजर जनरल डा अरविन्द यादव एडिशनल डायरेक्टर जनरल आर्टिलरी मुख्य अतिथि के रूप में आयोजन को गरिमा प्रदान करेंगे।

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