Bounsi News: दीपावली के दिन महानिशीथ काल में मां काली के पूजन का है विधान, जाने दीपावली पूजन का महत्व,तिथि एवं शुभ मुहूर्त

ग्राम समाचार,बौंसी,बांका। 

दिवाली का पर्व आने वाला है, इस पर्व में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। दिवाली की तैयारियां प्रखंड क्षेत्र के सभी घरों में आरंभ हो चुकी है। दिवाली का पर्व कार्तिक मास का प्रमुख पर्व है। दिवाली पर लक्ष्मी जी की विशेष पूजा की जाती है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन को महत्वपूर्ण माना गया है। ये पर्व लक्ष्मी जी को समर्पित है। इस दिन शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक लक्ष्मी जी की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। इस वर्ष दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन का शुभ योग में किया जाएगा। हिंदू धर्म में दीपावली के पर्व का विशेष महत्व है। दीपावली को प्रकाश का पर्व कहा जाता है। दीपावली को दिन लोग अपने घरों को झालरों, रोशनियों और दीयों की कतार से सजाते हैं। इस दिन गणेश लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। भगवान गणेश के पूजन से जहां शुभ और लाभ की प्राप्ति होती है। वहीं मां लक्ष्मी सुख और समृद्धि का वरदान देती हैं। गणेश – लक्ष्मी के साथ दीपावली के दिन महानिशीथ काल में मां काली के पूजन का विधान है। दीपावली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि के दिन मनाया जाता है। 


                                                                                                 
जानें दिवाली पूजन का महत्व

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन जीवन में आने वाली आर्थिक परेशानियों को दूर करने वाला माना गया है। शास्त्रों में लक्ष्मी जी को वैभव की देवी माना गया है। लक्ष्मी जी की कृपा से जीवन में संपन्नता आती है। कष्टों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि, दिवाली की रात शुभ मुहूर्त में पूजा करने से लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही कारण है, दिवाली की पूजा का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को दीवाली का त्योहार मनाया जाता है। इस साल 4 नवंबर 2021 को दिवाली मनाई जाएगी। पूरे देश में इसको लेकर पहले से तैयारियां शुरु हो जाती हैं। दिवाली से पहले लोग अपने घरों की अच्छे से सफाई करते हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि घर की सफाई के बाद भी कुछ चीजें ऐसी रह जाती हैं। जिनके होने से हमारे जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। घर में कुछ अशुभ चीजों के रहने से मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है और हमेशा धन की कमी बनी रहती है।                                                                                            

जानें दीपावली पूजन की तिथि

हिंदी पंचांग के अनुसार दीपावली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि के दिन मनाया जाता है। गणना के अनुसार इस साल कार्तिक अमावस्या कि तिथि 04 नवंबर को सुबह 06 बजकर 03 मिनट से शुरू होकर 05 नवंबर को रात 02 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। धर्माचार्यों के अनुसार दीपावली का त्योहार 04 नवंबर, दिन गुरूवार को मनाया जाएगा। दीपावली के पांच दिन का उत्सव 02 नवंबर को धनतेरस से शुरू हो रहा है, इसके अगले दिन नरकचौदस मनाई जाएगी। अन्नकूट और गोवर्धन पूजा दीपावली के बाद 05 नवंबर को प्रतिपदा के दिन की जाएगी। यम द्वितीया या भैय्या दूज का त्योहार 06 नवंबर को मनाया जाएगा।                                                        


दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त

दीपावली के दिन को लक्ष्मी पूजन के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का एक साथ पूजन करने का विधान है। इसके साथ ही इस दिन महाकाली और सभी पंथों के ईष्ट देवों का भी पूजन किया जाता है। दीपावली के दिन गणेश-लक्ष्मी के पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त प्रदोष काल को माना जाता है। जो कि 04 नवंबर को शाम 06.10 बजे से लेकर रात्रि 08.06 बजे तक रहेगा। इस बार लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे शुभ काल 1 घंटे 55 मिनट का है। इसके बाद रात्रि 11.38 बजे से 12.30 बजे तक महानिशीथ काल में मां काली के पूजन का मुहूर्त है।
 

कुमार चंदन,ग्राम समाचार संवाददाता,बौंसी।

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Editor - कुमार चन्दन, बाँका (बिहार)

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