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Bounsi News: श्यामबाजार के मोनू रंजन जरूरतमंदों के लिए बने मसीहा

ग्राम समाचार,बौंसी,बांका। 

मनुष्य मुख्य रूप से एक सामाजिक समुदाय का सदस्य है। मनुष्य को केवल अपने बारे में चिंतित नहीं होना चाहिए बल्कि समग्र रूप से समाज के कल्याण और उसके विकास के लिए भी चिंतित होना चाहिए, क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है वह अकेला नहीं रह सकता है। समाज उसे जीवन के सभी सुख और आवश्यकताएँ प्रदान करती है।समाज सेवा मनुष्य का एक ऐसा गुण है। जिसके लिए वह हमेशा याद किया जाता है। लेकिन आज भी समाज में कई तरह-तरह की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। जैसे गरीबी, निरक्षरता, जात-पात का भेदभाव, छुआछूत जैसे कई प्रकार की कुप्रथा समाज को आगे बढ़ने नहीं देती हैं। मनुष्य एक ऐसा जीव है। जो समाज और अपनें देश के लिए कुछ करना चाहता है। अपनी और अपने समाज में फैली गरीबी को दूर करने का प्रयत्न करता है। समाज सेवा एक शैक्षिक और व्यावसायिक विधा है, जो सामुदायिक संगठन एवं अन्य विधियों द्वारा लोगों एवं समूहों के जीवन स्तर को उन्नत बनाने का प्रयत्न करता है। इस पृथ्वी पर अन्य प्राणी अपने पेट के लिए परस्पर युद्ध करते रहते हैं, उन्हें एक दूसरे की चिंता नहीं रहती है। लेकिन मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, मनुष्य समूह में परस्पर मिल-जुलकर रहता है और समाज के अस्तित्व को बनाये रखने के लिए एक दूसरे के दुःख में भागिदार बनता है। इसी कड़ी में बौंसी प्रखंड स्थित श्याम 

बाजार के श्यामपुर निवासी मोनू रंजन इस कोरोना महामारी में जरूरतमंदों का सहारा बनकर जरूरतमंदों के बीच भोजन पहुंचाने का काम कर रहे हैं। बताते चलें कि डीएवी पटना में फिजिकल टीचर के पद पर कार्य कर रहे मोनू रंजन ने बौंसी में लॉकडाउन के दौरान कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए जरूरतमंदों के बीच डोर टू डोर जाकर भोजन पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं मोनू रंजन डोराडीह आदिवासी गांव में लाचार फागू मरांडी के लिए सहारा बने हुए हैं। उसे भोजन,वस्त्र मुहैया कराने के साथ-साथ उसके उजड़े हुए आवास को दुरुस्त कराने का भी बीड़ा उठाया है। साथ ही गोरगामा गांव निवासी हरिजन परिवार के सूरदास प्रकाश शाह के लिए स्वयं मोनू रंजन मसीहा बना है। पिछले माह कैरी गांव के शिव गंगा के पानी में लॉकडाउन के दौरान स्नान के क्रम में उसके 10 वर्षीय पुत्र डूबने लगा तभी पत्नी भी अपने पुत्र को बचाने के प्रयास में डूब गई थी। जिससे सूरदास कि पुत्री बेसहारा हो गई थी। पुत्री को पढ़ने के लिए ₹2000 प्रतिमाह देने का मोनू रंजन ने ऐलान किया। साथ ही पुत्री की पढ़ाई और शादी करने का भी जिम्मेवारी खुद लिया है। लाॅकडाउन के दौरान उन्होंने क्षेत्र के युवाओं को निशुल्क फिजिकल ट्रेनिंग देना आरंभ कर दिया है। उसके कार्य को देखते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी पंकज कुमार ने भी सराहना की है। मोनू रंजन की टीम में इसके साथ वार्ड सदस्य रामजी मिश्रा, मोनू साह, लक्ष्य आनंद, कारू साह, बाबा चौधरी, राकेश शर्मा, पंकज मिश्रा हैं। इसे कहते हैं असली समाज सेवा। बौंसी वासियों के लिए मोनू रंजन सोनू सूद से कम नहीं है। आजकल तो दिखावे के लिए कुछ लोग दो 4 किलो राशन गरीबों को देकर सिर्फ फोटो खिंचवाने में लगे रहते हैं। सिर्फ दिखावा के लिए समाज सेवा करते हैं। असली समाजसेवी तो मोनू रंजन है जो इस विपत्ति की घड़ी में लोगों के लिए निस्वार्थ सेवा दे रहे हैं। 

कुमार चंदन,ग्राम समाचार संवाददाता,बौंसी।

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Editor - कुमार चन्दन, बाँका (बिहार)

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