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Pathargama News: निजीकरण के विरोध में ग्रामीण बैंकों में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान



ग्राम समाचार, पथरगामा:-  झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक कर्मचारी संघ 15 एवं 16 मार्च के व्यापक हड़ताल की तैयारी में जुटी है। हड़ताल निजीकरण के विरोध तथा लंबित मांगों को लेकर हो रही है। इस हड़ताल के कारण सभी व्यवसायिक बैंक तथा ग्रामीण बैंक बंद रहेंगे ।यूनाइटेड फोरम ऑफ आर.आर.बी यूनियन्स के आव्हान पर झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी 15 एवं 16 मार्च 2021 को देशव्यापी हड़ताल में शामिल होंगे। झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक कर्मचारी संघ के क्षेत्रीय सचिव नितेश कुमार मिश्रा ने बताया कि बैंकों के निजीकरण के विरोध में यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल बुलाई गई है। बैंक यूनियन ने बैंक प्रबंधन एवं सरकार को हड़ताल की नोटिस दे दी है। झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक में भी दो दिवसीय हड़ताल का आयोजन किया गया है। इसके तहत झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक के सभी 443 शाखाओं , सभी क्षेत्रीय कार्यालयो तथा प्रधान कार्यालय रांची में भी हड़ताल रहेगा। नितेश मिश्रा ने बताया कि हमारी प्रमुख मांगों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण न किया जाए। ग्रामीण बैंकों में 11वे द्विपक्षीय वेतन समझौता एवं 8वां संयुक्त नोट को अविलंब पूर्णरूपेण लागू किया जाए। लंबे समय से लंबित मांगों की पूर्ति समेत कई मांगे शामिल है। इन सभी मांगों को लेकर देशभर के बैंक कर्मी 15 व 16 मार्च को राष्ट्रव्यापी हड़ताल में रहेंगे। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में झारखंड के 20 हजार कर्मचारी तथा पूरे भारत के 10 लाख से अधिक कर्मचारी शामिल होंगे। हड़ताल होने से बैंकों में करोड़ों का कारोबार प्रभावित होगा। श्री मिश्रा ने कहा कि आज देश के अंदर निजी बैंकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अच्छा काम कर रहे हैं। इससे ना सिर्फ आम जनों का सामाजिक एवं आर्थिक विकास हो रहा है बल्कि देश भी आर्थिक स्वावलंबन की ओर बढ़ रहा है। आज सार्वजनिक बैंक आम जनों के लिए सर्व सुलभ है, जबकि निजी बैंक अमीरों एवं कारपोरेट घरानों के लिए उपलब्ध है। फिर भी केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करना चाहती है। जिसका बैंकों में कार्यरत सभी श्रम संघ विरोध कर रहे हैं। मांगों के प्रति केंद्र सरकार की उदासीनता के कारण ग्रामीण बैंक कर्मियों में रोष है और वे आंदोलन की राह पर जाने को मजबूर है।

 -:अमन राज, पथरगामा:-

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Editor - भूपेन्द्र कुमार चौबे

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