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Godda News:video- बसडीहा में कोयला उत्खनन को लेकर झूठे वादे से नहीं सुलझ सका कब्रिस्तान का मामला, ईसीएल को जमीन नहीं मिलने से ग्रामीणों से किया अनुरोध


ग्राम समाचार, बोआरीजोर(गोड्डा)। बसडीहा गांव में ईसीएल पदाधिकारी और जिला प्रशासन के साथ विद्यालय प्रांगण में मुस्लिम समुदाय के बीच बैठक किया गया।

बसडीहा मौजा के रैयतों ने ईसीएल को कोयला उत्खनन के लिए तीन साल पुर्व जमीन दे चुकी है। लेकिन कब्रिस्तान को लेकर अभी दूसरे जगह तत्काल विस्थापित करने को लेकर बैठक रखा गया था। जबकि गांव को अभी तक पुनर स्थापित नहीं किया है।

मामला झारखंड प्रदेश के गोड्डा जिला में स्थित राजमहल परियोजना से जुड़ा ललमटिया कोयला खदान से है। यहां लगातार इस तरह की समस्या भूस्वामी के साथ आते रहती है।यहां के लोगों के लिए विस्थापन से  संबंधित समस्याएं अक्सर होती रहती है।

बैठक में जिला प्रशासन की ओर से महागामा एसडीओ जितेंद्र कुमार देव,बोआरीजोर सीईओ देव राज गुप्ता, ईसीएल प्रबंधन की ओर से जीएम देवेंद्र कुमार नायक, कार्मिक प्रबंधक एमके राव याधव,ईसीएल के कई अधिकारीगण, महागामा एसडीपीओ बिरेंद्र कुमार चौधरी,स्थानीय ललमटिया पुलिस, बसडीहा गांव के ग्राम प्रधान अनुपा किस्कू, मुखिया सोहागिनी मरांडी इत्यादि कई ग्रामीण मौजूद रहे। बसडीहा गांव के जमीन को ईसीएल द्वारा आधा से अधिक कोयला उत्खनन की जा चुकी है। सिर्फ  गांव बचा हुआ है। बसडीहा गांव के लोगों को अभी तक पूर्णरूपेण विस्थापित नहीं किया गया है गांव टापू बन कर रह गया है।

वही बसडीहा के मुस्लिम समुदाय के कब्रिस्तान को लेकर मामला तुल पकड़ता गया है। ईसीएल को कोयला उत्खनन कार्य में बाधाएं आ रही है। परियोजना का कहना है आपके कब्रिस्तान को फिलहाल दुसरे जगह विस्थापित किया जाएगा इसके बाद आपके गांव को भी बाद म़े विस्थापित किया जाएगा।   लेकिन ग्रामीणों का विरोध है कि पहले गांव को विस्थापित कीजिए। इसके बाद कब्रिस्तान साथ में जाएगा।  बसडीहा गांव की हालात इतनी भवाह है की गांव को टापू बना कर छोड़ दिया गया है। हैवी ब्लास्टिंग भी किया जाता है। कभी भी अप्रिय घटनाएं घट सकती है। चार साल से विस्थापन के लिए बसडीहा के भु-स्वामि भटक रहे हैं। ईसीएल प्रबंधक द्वारा बैठक में अपने प्रस्तावों को रखते हुए मुसलिम समुदाय को कहा गया कि मांइस को आगे बढ़ाने में जमीन की आवश्यकता है। अभी तत्काल अगर किसी का कुछ हो जाए या मर जाए तो इसके लिए फिलहाल ईसीएल द्वारा आपके कब्रिस्तान को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। जब आपके गांव को जहां अस्थाई रूप से विस्थापित करेंगे तब फिर आपके कब्रिस्तान को वहां साथ में विस्थापित कर दिया जाएगा। वही मुस्लिम समुदाय का कहना है हमारे इस्लाम के अंदर अपने कब्रिस्तान या मस्जिद को यहां वहां किया किया जान, कुछ दिन के लिए ले जाना हमें धर्म इजाजत नहीं देेती है। हम चाहते हैं कि कुछ भी हो जो फैसला किया जाएगा तो एक ही बार किया जाए। बैठक में बसडीहा के रैयतों ने तो पुर्व में हुऐ वादे को पोल खोलते हुए कहा परियोजना को जब जमीन नहीं मिल रही थी, तब ईसीएल ने ग्रामीणों के साथ संवेदनशीलता से बातचीत किया, हमें जमीन चाहिए कई वादे इरादे करते-करते ग्रामीणों ने देश के हित के प्रति जमीन अधिग्रहण में सहमति दिया। साथ ही ईसीएल प्रबंधन के द्वारा कहा गया कि प्रत्येक परिवार को पांच पांच लाख रुपए देने का भी वादा किया था। तब रैयतों ने ईसीएल को जमीन देने का प्रक्रिया शुरू किया। रैैयतों का अधिकार बोले या आशा बोले या लालच या इसमें भी बसडीहा के के ग्रामीणों को हाथ धोना पड़ा। लेकिन ईसीएल ने इस वादे को ठुकरा दिया। ग्रामीणों ने कहा जब 4 साल पहले ईसीएल को जमीन नहीं मिल रहे थे। बसडीहा के ग्रामीण जमीन नहीं देने के पक्ष में था, जमीन नहीं देना चाहते थे। लेकिन उस वक्त बसडीहा के रैयतों और प्रबंधन के बीच में विवाद हुई जिसमें कई ग्रामीणों के ऊपर ललमटिया थाना में प्राथमिकी भी दर्ज हुआ। मामला दर्ज होने के बाद मामला कोर्ट तक पहुंच गया , लोग डर गए। जिससे ग्रामीण परेशान हुए। इस मामले को लेकर ईसीएल ने रैयतों को कहा  परियोजना को जमीन देने में सहयोग कीजिए, आप लोगो का केश खत्म हो जाएगा। पर जमीन काट के खत्म किया लेकिन 4 साल हुआ केश अब तक खत्म नहीं हुआ। आप इसे क्या समझेगें। 

मुस्लिम समुदाय ने  ईसीएल प्रबंधन के  झूठे आश्वासन से परेशान रैयत का कहना है  कि ईसीएल द्वारा मुस्लिम समुदाय को विस्थापित के लिए प्लॉट दिखाया जा रहा है पर घर बनाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। वहीं उपस्थित ईसीएल के जीएम वीरेंद्र कुमार नायक ने इस मामले को लेकर जमीन नहीं मिलने से कॉल उत्खनन में समस्याएं आ रही है उन्होंने कहा आप सभी रैयतों की ओर से सहयोग की अपील करते हैं ।कब्रिस्तान को वहां से तत्काल शिफ्ट किया जाए। जी एम ने मुसलिम समुदाय से अनुरोध किया कि आपलोगों को विस्थापित में अच्छा फैसिलिटी देने का भी आश्वासन दिया।

ईसीएल प्रबंधक,जिला प्रशासन के बीच बसडीहा के मुस्लिम समुदाय के साथ घटों वार्ता हुई। रैयतों द्वारा कहां गया कब्रिस्तान को फिलहाल यहां वहां विस्थापित के लिए कोई सहमति नहीं बनी। मामले को टाला गया ग्रामीणों ने कहा पहले गांव का विस्थापित होगा इसके बाद कब्रिस्तान विस्थापित होगा। पहले जिंदा का विस्थापित, इसके बाद मुर्दा का होगा विस्थापित। काफी मस्कत होने के बावजूद भी ईसीएल प्रबंधन  और रैयतों के बीच सहमति नहीं बनी ईसीएल की ओर से आगे पुनर्विचार के लिए रैयतों को फिर से समय दिया गया। आगे अब दिखा दिखा जाए वैसे झूठे वादे बन कर रह जाते हैं रैयत रह जाते हैं रैयत या उन्हें मूलभूत सुविधा के साथ गांव और कब्रिस्तान को साथ में विस्थापित करेगा विस्थापित करेगा में विस्थापित करेगा।

                                  -ग्रामीण समाचार, बोआरीजोर(गोड्डा)।





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Editor - विलियम मरांड़ी।

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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