Godda में CBI का छापा : राजमहल कोयला परियोजना ललमटिया में ECL अघिकारी घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, मचा हड़कंप - जानिए पूरा मामला

गिरफ्तार लिपिक गोकुल चंद्र साह
ग्राम समाचार,  महागामा (गोड्डा)। शनिवार को इस्टर्न कोल फ़ील्ड्स लिमिटेड (ECL) के गोड्डा जिला स्ठित राजमहल परियोजना कर्मचारी को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)  की टीम ने घूस लेते  रंगे हाथों  गिरफ्तार कर लिया। 

मामले पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बताया  कि,  गोड्डा (झारखंड) के राजमहल क्षेत्र के अंतर्गत  राजमहल ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (OCP) में नियुक्त लिपिक गोकुल चंद्र साह   को  रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 

लिपिक गोकुल चंद्र साह ने 35 हजार रूपये की मांग की थी। वह शिकायत कर्ता से 25 हजार  रूपये की पहली किस्त महागामा स्थित (NHS कॉलोनी) अपने आवास पर ले रहा था, कि उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया । मौके पर सीबीआई ने रिश्वत के इरादे से संबंधित दस्तावेजों को बरामद किया है।

CBI ने जानकारी देते हुए कहा है कि, शिकायत कर्ता ने अपने पिता की मृत्यू के बाद अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए इस्टर्न कोल फ़ील्ड्स लिमिटेड (ECL) के  ललमटिया स्थित राजमहल परियोजना में आवेदन दिया था।  

संबंधित फाइल को आगे बढ़ाने और जल्द काम करने के एवज में नियुक्त लिपिक गोकुल चंद्र साह ने  पैसे की मांग की थी। इस शिकायत पर CBI ने राजमहल ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (OCP) में नियुक्त लिपिक गोकुल चंद्र साह के विरूद्ध मामला दर्ज किया  था। 

 CBI की टीम ने आरोपी  को रंगे हाथों गिरफ्तार करने के बाद महागामा स्थित ECL के अतिथि गृह (राजमहल हाउस) ले आई, जहां उससे दिन भर गहन  पूछ-ताछ की गई। 

राजमहल हाउस

देर शाम CBI की टीम,  गिरफ्तार लिपिक गोकुल चंद्र साह को अपने साथ  लेकर धनबाद के लिए रवाना हो गई जहां बतौर सीबीआई आरोपी को धनबाद में सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेश किया जाएगा। 

CBI को कैसे मिली सफलता ?


झारखंड  के  गोड्डा जिला स्ठित इस्टर्न कोल फ़ील्ड्स लिमिटेड (ECL) के  राजमहल परियोजना  में कार्यरत लिपिक गोकुल चंद्र साह को गिरफ्तार करने में  जुटी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)  की टीम पिछले एक सप्ताह से लगातार मेहनत कर रही थी। 

किसी को कोई शक न हो, इसलिए  टीम के सदस्यों ने अपने रहने का ठिकाना गिरफ्तारी के जगह से करीब 27 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय गोड्डा को बनाया। 

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)  की टीम के तेज तर्रार ऑफिसर पिछले 5-6 दिनों से मामले पर  लगातार  बारीकी से नजर बनाए हुए थे। 

गिरफ्तारी के दिन  सीबीआई की पूरी टीम ने अपना हुलिया स्थानीय लोगों जैसे बनाया और आरोपी के आवास के पास अपना जाल बिछा दिया। 

तय दिन शनिवार सुबह शिकायत कर्ता से  आरोपी क्लर्क गोकुल चंद्र साह जब रिश्वत ले रहा था, उसी समय बाहर तैनात टीम के सदस्य अंदर आए और रंगे हाथों धर दबोचा। 

सीबीआई की टीम

CBI अधिकारियों नें   गोकुल चंद्र साह से करीब डेढ़ घंटे तक उसके NHS  क्वाटर में ही पूछताछ की।  उसके बाद स्थानीय गेस्ट हाउस (राजमहल हाउस)  ले जाकर दिन भर पूछताछ की,  फिर देर शाम अपने साथ ले गई।

गिरफ्तार गोकुल चंद्र साह की पत्नी ने बताया - 


इधर  गिरफ्तार गोकुल चंद्र साह की पत्नी ने बताया कि-  "सुबह सात बजे करीब  दर्जन भर लोग मेरे क्वाटर  में   आए और  क्वाटर के अंदर घुस गए।  पूछने पर बताया कि ऊपर से जांच करने का आदेश आया है।  फिर हमलोगों को अलग कर,  एक कमरे में उनसे पूछताछ करने लगे। लगभग डेढ़ घंटे बाद उसे अपने साथ लेकर उर्जानगर स्थित  एक्सपर्ट होस्टल  (राजमहल हाउस) ले गए ।


ओसीपी महाप्रबन्धक ऑपरेशन किशोर कुमार ने कहा - 


वहीं मामले को लेकर ओसीपी महाप्रबन्ध ऑपरेशन किशोर कुमार ने ग्राम समाचार द्वारा,  गोकुल चन्द्र साह के बारे में  पुछे जाने पर बताया कि -  "वे अनुकम्पा पर नॉकरी देने वाले विभाग में क्लर्क हैं।"


एरिया पर्सनल मैनेजर एच के चौधरी ने कहा - 


घटना पर एरिया पर्सनल मैनेजर एच के चौधरी ने बताया कि, - "अनुकम्पा के आधार पर नौकरी देने से जुड़ा एक मामला था,  जिसमें फाइल रोके जाने और रिश्वत की मांग करने  के कारण नौकरी पाने वाले लड़के ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को मामले की जानकारी दी थी।  जिसमे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)  की टीम ने ट्रैक करते हुए 25 हजार रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार लिया।" 

आखिर मामला क्या था, जिस पर CBI ने किया गिरफ्तार ? 


प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय गुदिया ग्राम के  निवासी रमेश कुमार के पिता संजय कुंवर ईसीएल में सिक्योरिटी गार्ड के  पद में कार्यरत थे। काफी दिनों  बीमार रहने  के बाद इलाज के दौरान ईसीएल अस्पताल में 30 जनवरी 2020 को उनका निधन हो गया था। 

पिता के निधन के बाद पुत्र ने अनुकंपा पर नौकरी के लिए आवेदन किया था। लेकिन अनुकंपा पर नियुक्ति के लिए ओसीपी के  लिपिक गोकुल चंद्र  साह द्वारा 5 लाख रुपये की मांग की गई थी। पैसा  नहीं दिए जाने के कारण अनुकंपा पर नियुक्ति संबंधित संचिका (कागजात) लिपिक द्वारा आगे नहीं बढ़ाई जा रही थी।

आरोपी  लिपिक  गोकुल चंद्र साह  के अड़ियल रवैये से त्रस्त होकर अभ्यर्थी रमेश कुमार ने सीबीआई से शिकायत की थी। 

तहकीकात में अनुकंपा पर नियुक्ति के लिए रुपए मांगने संबंधी आरोप की पुष्टि होने पर सीबीआई ने भ्रष्ट लिपिक के खिलाफ मामला दर्ज कर रंगे हाथों धर दबोचने के लिए जाल बिछाया।

शनिवार की सुबह लिपिक गोकुल चंद्र साह  के आवास पर पहली किस्त  के तौर पर 25 हजार रुपए देने के लिए रमेश कुमार पहुंचे थे। इसी बीच सीबीआई के टीम ने    25 हजार रुपए घूस लेते रंगे हाथों  लिपिक को धर दबोचा। साथ ही सीबीआई टीम ने उनके आवास को भी घंटों खंगाला।

मिली जानकारी के अनुसार, सीबीआई टीम ने लिपिक के आवास से अनुकंपा पर नियुक्ति संबंधी 20 से 25 फाइलें भी बरामद की  हैं । सीबीआई टीम  द्वारा राजमहल परियोजना के ओसीपी स्थित कार्यालय में जाकर भी घंटों छानबीन की गई ।

सीबीआई की टीम

इसके बाद राजमहल परीयोजना स्थित राजमहल हाउस महागामा में गिरफ्तार लिपिक से दिन भर लगातार पूछताछ की गई। 

देर शाम CBI की टीम,  गिरफ्तार लिपिक गोकुल चंद्र साह  को अपने साथ  लेकर धनबाद के लिए रवाना हो गई जहां बतौर सीबीआई आरोपी को धनबाद में सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेश किया जाएगा। 

परियोजना के भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मियों के बीच मचा है हड़कंप


सीबीआई की इस कार्रवाई से इस महत्वाकांक्षी कोयला परियोजना के भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया है।  भ्रष्टाचार में लिप्त रहने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही हैं। 

मिली जानकारी के अनुसार,  इस परियोजना में जमीन के बदले या अनुकंपा पर नौकरी देने के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार का खेल खेला जाता रहा है। लेकिन इसके पूर्व कोई मामला सीबीआई तक नहीं पहुंच सका था। परिणाम स्वरूप भ्रष्टाचारी अधिकारियों का मनोबल काफी बढ़ा हुआ था।

सूत्रों की माने तो परियोजना में अनुकम्पा के आधार पर नौकरी पाने वालों से लाखों की डिमांड कर वारे न्यारे किये जाते रहे हैं।

बताया जाता है कि इसका एक गैंग है जो मिल कर यह काम वर्षों  से कर रहा है। अगर गहराई से इसकी जांच हो तो कई अधिकारी व कर्मचारी भी सलाखों के अंदर होगें। 

- ग्राम समाचार के लिए कैलाश शर्मा के साथ राजीव कुमार की विशेष रिपोर्ट।
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