ग्राम समाचार, भागलपुर। राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य भाजयुमो सह पूर्व प्रत्याशी भागलपुर विधान सभा अर्जित शाश्वत चौबे ने नगर विधायक अजित शर्मा द्वारा आपात्तिजनक बयान देते हुए शराबबंदी ऐक्ट को खत्म करते हुए शराब की दुकानों को खोले जाने पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। साथ ही उनके इस गैर जिम्मेदाराना बयान के लिए भागलपुर सहित बिहार की तमाम माताओं-बहनों से माफी मांगने को कहा है जो प्रतिदिन घरेलू हिंसा और मार-पीट की शिकार होती थीं। अर्जित ने आपत्ति जताते हुए कहा कि शराब सेवन जैसे व्यविचार को कोई सही कैसे मान सकता है? वह भी जब कोई व्यक्ति किसी संवैधानिक पद पर हो। यह कार्य तो कोई जनप्रतिनिधि नही कर सकता जिन्हें जनता की चिंता होती है। आखिर समाज को ठीक करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री बिहार द्वारा शराबबंदी जैसे सराहनीय कार्य के लिए उन्हें जनता एवं केंद्र सरकार से प्रोत्साहन मिल चुका है। शराबबंदी के कारण बिहार में बढ़ रहे अपराध में भारी गिरावट आई है। खासकर घरेलू हिंसा और मारपीट की घटनाएं तो नही के बराबर हैं। शराब पीकर सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या भी नगण्य है। शराब के सेवन से ना सिर्फ व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब होता है बल्कि उसका सम्पूर्ण परिवार भी तबाह हो जाता है। बिहार में कमजोर वर्ग का व्यक्ति अपनी गाढ़ी कमाई को शराब के नशे के लिए खत्म कर रहा था जिसपर अंकुश लगाने का काम राज्य सरकार ने किया है ताकि उसकी कमाई से उसका घर चल सके। शराब पीना एक सामाजिक बुराई तो है ही साथ ही इसके सेवन और बाद में दुर्घटना से करोड़ों का राजस्व बर्बाद हो रहा था जिसे बचाने का काम हुआ है। अर्जित ने विधायक अजित शर्मा से पूछा है कि- क्या वे चाहते हैं कि गरीब मजदूर जो अपने परिवार के लिए काम करके, मेहनत मजदूरी करके दो पैसा कमा रहें है उस पैसे से अब वे शराब पियें और बिहार सरकार उनसे राजस्व वसूले? क्या जिन्होंने शराब पीना छोड़ दिया है उन्हें आप फिर से शराब की लत लगवाना चाहते हैं ताकि उनका आत्मसम्मान खत्म हो जाये और वे फिर से अपनी बीवी बच्चों के साथ मार-पीट करें? क्या विधायक जी चाहतें हैं कि बिहार में दूसरा कोई भी उद्योग नही लगे ताकि इन बेबस मजदूरों को नौकरी के लिए दर-दर की ठोकर खाना पड़े? क्या वे चाहते हैं कि नए लोग शराब की लत लगाएं और बिहार सरकार का खजाना भरें ताकि राजस्व बढ़े। क्या वे होटल चालू करवाकर शराब परोसवाना चाहते हैं जो बंद हो चुका है। चूंकि उन्होंने कहा कि अभी लॉक डाउन में बड़े कंपनियों के लोगों जिसमे छड़ आदि व्यवसायी को बड़ी तकलीफ हो रही है जो अपने बिजनस के लिए भागलपुर आते हैं? क्या जो शराब की दुकानों को छोड़कर दूध का व्यवसाय कर रहें है, रेस्टुरेंट चला रहे हैं एवं अन्य समाज उपयोगी काम कर रहें हैं उन्हें वर्तमान कार्य को छोड़कर फिर से शराब की दुकान खोल देनी चाहिए ताकि सरकार को ज्यादा राजस्व आ सके? क्या ऐसे गरीब मजदूरों को जिन्होंने अपनी शराब पीने की आदत छोड़ दी है उन्हें आपके कहे अनुसार राशन और पैसा दे देना चाहिए ताकि वे फिर से शराब दुकान जाकर उस पैसे से अपने लिए मौत खरीद सकें? क्या आपने जो दूध की बात कही की चोट बच्चों को दूध मुहैया करानी चाहिए तो क्या शराब दुकान खोल देने से शराबी बच्चों के लिए दूध लाएंगे या अपने लिए शराब? अर्जित ने कहा कि ऐसे बेबुनियाद, बेतुका और बेहिसाब बात कहकर विधायक अजित शर्मा ने ना केवल गरीबों का भद्दा मजाक बनाया है बल्कि घाव कुरेदने का भी कार्य किया है जिसकी तीव्र निंदा की जानी चाहिए।
- Blogger Comment
- Facebook Comment
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें
(
Atom
)

0 comments:
एक टिप्पणी भेजें