ब्यूरो रिपोर्ट ग्राम समाचार बांका। भारत ने पिछले कुछ दशकों में शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। हालाँकि, भारतीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है। हालाँकि भारतीय शिक्षा प्रणाली में कई सुधार हुए हैं, लेकिन देश की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है। इसी कड़ी में बांका जिलांतर्गत रजौन प्रखंड सिंहनान पंचायत के खुशहालपुर गांव में अवस्थित अथर्व पब्लिक स्कूल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है। इस आशा की जानकारी प्रधानाध्यापिका प्रियंका प्रियदर्शनी ने दी। उन्होंने बताया कि भारतीय स्कूलों में शिक्षा की खराब गुणवत्ता के लिए बुनियादी ढांचे और संसाधनों की कमी भी एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता है। भारत के ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में बिजली, साफ पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इसके अतिरिक्त, शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में सर्वांगीण शिक्षा प्रदान करने के लिए कंप्यूटर और पुस्तकालय जैसे पर्याप्त संसाधन नहीं हो सकते हैं। संसाधनों और बुनियादी ढांचे की कमी भी शिक्षण की गुणवत्ता को प्रभावित करती है, क्योंकि शिक्षकों के पास आवश्यक शिक्षण सहायता और सामग्री तक पहुंच नहीं हो सकती
है। बहुत हद तक समस्याओं को दूर करने का प्रयास हमने अपने विद्यालय में किया है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है। मौके पर चेयरमैन उदय कुमार सिंह ने बताया कि छात्रों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी उनकी शिक्षा गुणवत्ता निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के बच्चे अक्सर अपर्याप्त सुविधाओं और संसाधनों वाले खराब वित्त पोषित स्कूलों में जाते हैं। इसके अलावा, ऐसे छात्रों को अपने परिवार का समर्थन करने के लिए काम करना पड़ सकता है, जिससे उनकी उपस्थिति और स्कूल के प्रदर्शन पर असर पड़ेगा। निर्देशक संदीप कुमार ने बताया कि मानकीकृत परीक्षण, मूल्यांकन और मूल्यांकन सहित विभिन्न तरीके, भारतीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को मापते हैं। इन विधियों का उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में स्कूलों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना है और हम लोगों ने बहुत हद तक प्रयास कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का प्रयास किया है। जिसका परिणाम स्पष्ट दिख रहा है कि हमारे विद्यालय में काफी संख्या में अभिभावक अपने बच्चे को लेकर आते हैं और नामांकन करते हैं। हमने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर लोगों को जागरूक करने का काम किया है और भविष्य में भी इस प्रयास को कायम रखा जाएगा।
कुमार चंदन,ब्यूरो चीफ,बांका।

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