Bounsi News: प्रखंड में कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र का हुआ शुभारंभ,प्रथम दिन मां शैलपुत्री की हुई विधिवत पूजा अर्चना

ग्राम समाचार,बौंसी,बांका। बौसी प्रखंड क्षेत्र में शारदीय नवरात्र पर्व की शुरुआत सोमवार से कलश स्थापना के साथ हो गई। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाएगी। प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न जगहों पर पूजा पंडाल बनाकर एवं मंदिरों में मां दुर्गा की प्रतिमा को स्थापित किया गया है। कलश स्थापना के साथ ही वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ पूरा प्रखंड क्षेत्र गुंजायमान हो गया। हालांकि दुर्गा पूजा का माहौल 2 दिन पूर्व से ही दिखने लगा था। पंडितों की मानें तो इस बार देवी का आगमन हाथी पर हुआ है। जो सुख, समृद्धि, कामना पूर्ति के साथ देश में खुशहाली लाने का सूचक है। मुख्य रूप से बौंसी पुरानी हॉट स्थित दुर्गा मंदिर, कुड़रो दुर्गा मंदिर, गोकुला दुर्गा मंदिर,चांदन डैम स्थित वैष्णवी दुर्गा मंदिर,श्याम बाजार दुर्गा मंदिर,सिकंदरपुर दुर्गा मंदिर, गोलहट्टी दुर्गा मंदिर,भंडारीचक दुर्गा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पूजा अर्चना की गई। नवरात्रि के पहले दिन देवी शैलपुत्री की उपासना की गई। 

पौराणिक मान्यता है कि, देवी शैलपुत्री की उपासना करने से माता अति प्रसन्न होती है। जो भी भक्त देवी दुर्गा के इस रूप की पूजा निष्ठा पूर्वक करते हैं। उसे माता भाग्य और सौभाग्य प्राप्त करती है। मालूम हो कि, ऐतिहासिक पर्यटक क्षेत्र मंदार स्थित बौंसी बाजार के ह्रदय स्थली में पुरानी हॉट स्थित दुर्गा मंदिर में वैष्णव पद्धति से पूजा करने की परंपरा डेढ़ सौ सालों से होती आ रही है। जो आज भी अनवरत जारी है। ऐसी मान्यता है कि इस दुर्गा मंदिर में सबकी मनोकामना पूर्ण होती है। लोगों का ऐसा कहना है कि इस मंदिर में 70 के दशक के पहले बलि प्रथा की परंपरा थी। बाद में श्रद्धालुओं ने बलि प्रथा बंद करते हुए वैष्णवी पद्धति से पूजा अर्चना की शुरुआत की। कहा जाता है कि, मां दुर्गा द्वारा मंदिर के पुजारी को स्वप्न दिया गया था कि, मैं यहां पर वैष्णवी रूप में हूं और मेरी पारंपरिक पूजा वैष्णवी पद्धति से होनी चाहिए। इसके बाद लोगों ने पुजारी की बात मानकर मंदिर में वैष्णव पद्धति से पूजा प्रारंभ कर दी। इतिहासकारों का कहना है कि 1962 से पूजा की शुरुआत की गई थी। यहां शारदीय नवरात्र में मां की पूजा अर्चना विश्व भव्यता के साथ की जाती है। मालूम हो कि, तत्कालीन ब्रह्मपुर गांव के ठाकुर साहब परिवार द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। जिसके बाद से मंदिर समिति सदस्यों द्वारा भव्य और आकर्षक तरीके से निर्माण कराया गया।


मंदिर की विशेषता

वैष्णवी दुर्गा की मान्यता होने से शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध देवी की आराधना से मनवांछित फलों से प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस वजह से भारी संख्या में श्रद्धालु भक्तों की भीड़ यहां रहती है। प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से यहां पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अष्टमी के दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। यहां पर समाज सेवा के लिए धर्मशाला का निर्माण कराया गया है।

मंदिर की सुंदरता देखने योग्य

मंदिर का भव्य स्वरूप तेतरी दुर्गा मंदिर के गुंबद के तर्ज पर है। मंदिर की अलौकिक छटा आकर्षित करती है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के दाएं बाएं आकर्षक छोटे मंदिरों में कीमती पत्थर के बने हनुमान एवं गणेश की बड़ी प्रतिमा है। जहां रोज भारी संख्या में लोग पूजा अर्चना करते हैं। बताते चलें कि हर रोज संध्याकाल में सैकड़ों महिलाएं भजन गीत एवं मंगल आरती की धार्मिक साधना के लिए जुटती है। इसके अलावा  दुर्गा पूजा के दसवें दिन में आदिवासी नृत्य का कार्यक्रम किया जाता है। दुर्गा पूजा के अवसर पर यहां भव्य मेले का भी आयोजन किया जाता है। साथ ही भव्य तरीके से रावण वध का भी आयोजन पूजा आयोजन समिति के द्वारा रखा जाता है। जिसमें रावण की भव्य प्रतिमा को बनाकर उसका दहन किया जाता है। 

 कुमार चंदन,ग्राम समाचार संवाददाता,बौंसी।

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Editor - कुमार चन्दन, बाँका (बिहार)

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