Bounsi News: बौंसी प्रखंड में भी अगर होती बड़ी कंपनी, तो युवाओं को मिलता रोजगार

ग्राम समाचार,बौंसी,बांका। 

आज के वैश्विक महामारी कोरोना से पूरी दुनिया में बेरोजगारी का संकट व्याप्त हो गया है। जो भी मजदूर परदेस में कमाने गए थे वे अब बाहर से अपने घर आ गए हैं। कुछ मजदूर तो पहले लॉकडाउन में ही घर आए थे। पुनः कोरोना कि दूसरी लहर के लाॅकडाउन  की वजह से कुछ मजदूर घर आ गए हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इतने लोगों को आखिर आने वाले समय में किस प्रकार से रोजगार दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में अगर बौंसी का अल्ट्रा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट बन गया होता तो बेरोजगारी के लिए यह एक वरदान साबित होता है। परंतु ऐसा हुआ नहीं। मालूम हो कि, बौंसी प्रखंड के बंधुआकुरावा में 3640 मेगावाट का अल्ट्रा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट लगाया जा रहा था। कोयला घोटाले में कंपनी का नाम आने की वजह से 2013 के बाद उसका निर्माण 

 

कार्य अधर में अटका रह गया। अगर यह पावर प्रोजेक्ट यहां पर लग गया होता तो, आज पूर्णतः यह चालू अवस्था में होता और इस पावर प्रोजेक्ट में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों रूप से 10000 की संख्या में लोगों को रोजगार मिलता। परंतु बांका जिले में औद्योगिक इकाइयों के लिए बना दुर्भाग्य उसका पीछा नहीं छोड़ रहा है। इस सुपर पावर प्रोजेक्ट पर ग्रहण लगा हुआ है। वर्तमान में इस पावर प्लांट का 720 एकड़ भूमि अधिग्रहित है। जिस पर विभिन्न बैंकों का कब्जा है। इस वजह से जिसके भूमि का उपयोग भी नहीं हो पा रहा है। चाइना से काफी कंपनियां पलायन कर रही है और भारत की तरफ रुक कर रही है। ऐसे में अगर सरकार पहल कर इस स्थल पर पुनः किसी बड़े प्रोजेक्ट को स्थापित कराए तो ना सर्फ बांका जिला बल्कि आसपास के जिलो के लोगों को भी इसमें रोजगार मिलेगा और विकास के नजरिए से फिलहाल ऐसी संभावना बन रही है कि, यहां के बंद पड़े रोजगार को चालू किया जा सके। लॉकडाउन के बाद बिहार में रोजगार के साधन बढ़ाने पर सरकार कार्य करेगी अगर यहां पर कोई बड़ा उद्योग स्थापित हो जाए तो, काफी लोगों को रोजगार मिल जाता। बताते चलें कि, पास के गोड्डा जिले के मोतिया गांव 


में बने हुए अदानी पावर प्लांट के जलते हुए लाइटों को देखकर स्थानीय लोगों का दिल कचोटता है कि काश यहां का भी पावर प्लांट आरंभ हो जाता तो कई लोगों की बेरोजगारी की समस्या दूर हो जाती। बताते चलें कि, 2006 में आरंभ हुआ अभिजीत पावर प्लांट का कार्य बौंसी के सीरिया मौजा में पावर प्लांट लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य आरंभ हुआ था। इसके बाद किसानों ने बौंसी प्रखंड के 4 पंचायतों गोकुला, असनाहा, फागा, सांपडहर आदि पंचायतों के किसानों की जमीन लेकर उस पर पावर प्लांट का कार्य आरंभ हुआ था। मेनका पहाड़ी में पावर प्रोजेक्ट के लिए 660 मेगा वाट का एक यूनिट बनकर तैयार हो गया था और व्यालर का कार्य आरंभ हो चुका था। बंधुआकुरावा में ऑफिस इंफ्रास्ट्रक्चर बनकर पूरी तरह से तैयार था। जहां पर सीसीएम, डीजीएम सहित कंपनी के 120 स्टाफ कार्य कर रहे थे। वहीं विभिन्न सहायक कंपनियां एवं आसपास के गांव के करीब ढाई हजार लोगों को रोजगार मिला था। ऐसे में ना सिर्फ बौंसी बल्कि पूरे जिले की आर्थिक तस्वीर बदल रही थी। इसी बीच इस पावर प्लांट को ग्रहण लग गया और जनवरी 2013 में इसका कार्य पूरी तरह से बंद हो गया और अक्टूबर 2013 में तो 

 

ताला लटक गया। यहां पर कार्यरत सभी स्टाफ को यहां से हटा दिया गया। साथ ही कंपनी अपना सारा सामान समेटकर यहां से फरार हो गई। इस कंपनी में कार्य कर चुके कुछ पूर्व के कर्मचारियों ने बताया कि, कंपनी पर कई हजार का लोन विभिन्न बैंकों का था। अब यहां की पूरी संपत्ति बैंकों के पास गिरवी है। जबकि काफी स्टाफ के वेतन का भुगतान तक नहीं हो पाया था। जिन्हें जहां जगह मिली वह चले गए। अब जिला वासियों की मांग है कि, इतने बड़े प्रोजेक्ट को पुनः स्थापित करने के लिए जिले के जनप्रतिनिधि अपने स्तर से सरकार से यह मांग करें कि, यहां की भूमि का उपयोग कर कोई उद्योग स्थापित किया जाए। ताकि क्षेत्र के लोगों एवं युवाओं को रोजगार मिल सके। मालूम हो कि,पावर प्लांट के बंद होने के बाद यहां के ऑफिसों की स्थिति बदहाल में हो गई है। यहां के निर्माण किए गए भवनों की दीवारें फट गई हैं। बड़े बड़े वृक्ष हो गए हैं। यहां बड़े-बड़े सांपों का बसेरा बन गया है। लोगों की चहलकदमी नहीं होने के कारण यह जगह डरावनी प्रतीत होती है। वहीं इसके आरंभ हो जाने से 10 हजार लोगों को  रोजगार मिलता। बताते चलें कि प्लांट के 700 एकड़ भूखंड पर  कोई बड़ा उद्योग लग सकता है । इस प्रोजेक्ट के चालू होने से पलायन कर आए लोगों को रोजगार मिलता। पावर प्रोजेक्ट चालू होने से जिले का पलायन थमता।  

कुमार चंदन,ग्राम समाचार संवाददाता,बौंसी।

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Editor - कुमार चन्दन, बाँका (बिहार)

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