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Rewari News : गांव भूरियावास में फसल विविधिकरण के साथ आर्गेनिक खेती को भी मिल रहा प्रोत्साहन

रेवाडी,23 मई। प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को परंपरागत खेती हो छोडकर फसल विविधिकरण को बढावा देने,साथ ही बागवानी अपनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को अब पंख लगने लगे हैं,जिसके चलते किसान कम पानी वाली बागवानी की खेती को बढावा दे रहे हैं। जिला रेवाडी के गांव भूरियावास के प्रगतिशील किसान जिले सिंह  आज न केवल पंरपरागत फसलों को छोडकर बागवानी अपना रहे हैं,साथ ही सुक्षम सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से आर्गेनिक खेती करके दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन रहे हैं। जिले सिंह कई किसान कल्बों के सदस्य होने के अलावा बागवानी में विशेष रूचि रखते हैं। वर्तमान में जिले ङ्क्षसह बागवानी के जरिए खरबूजा,तरबूज,टमाटर ,देसी टिंडा आदि फसलों की सफलतम खेती कर लाखों रूपए कमा रहे हैं। उनका सपना है कि प्रत्येक किसान कम पानी की लागत वाली बागवानी अपनाएं,जिससे जल संरक्षण को बढावा मिल सके। 



सैनिक से प्रगतिशील किसान बने जिले सिंह
सेना में देश सेवा के दौरान जिन हाथों में राईफल होती थी,आज पेंशन आने उपरांत पूर्व सैनिक जिले सिंह ने उन हाथों से कृषि यंत्र उठाकर प्रगतिशील किसान बनने का सपना संजोया और बागवानी की खेती में लग गए। उनका मानना है कि अगर किसान परंपरागत खेती की बागवानी अपनाए तो किसान की आय दो गुणा की बजाय तीन गुणा भी हो सकती है। बशर्ते की सरकार के बागवानी विभाग,कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों की सलाह पर खेती की जाए। बागवानी विशेषज्ञों का किसानों को प्रगतिशील बनाने में काफी योगदान रहता है,जिसके लिए वे बागवानी अधिकारी डा. सत्यवीर शर्मा,डा. प्रेम यादव और अन्य कृषि विशेषज्ञों को अपना आदर्श मानते हैं। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में सरकारें वर्ष 2022 तक देश के किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य पर काम कर रही हैं,जिससे किसानों को काफी फायदा मिल रहा है। इसके अलावा जल संरक्षण को बढावा देने के उददेश्य से वन ड्राप मोर क्राप,स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाया जा रहा है।
भूरियावास के खरबूजे और तरबूज की गुरूग्राम व दिल्ली जैसे बड़े शहरों में डिमांड
खरबूजा और तरबूज की तैयार फसल के बारे में प्रगतिशील किसान जिले सिंह कहते हैं कि उन्होंने लगभग डेढ एकड जमीन पर आरोही,रमैया,जन्नत किस्म के तरबूज और मुस्कान व रमैया किस्मों के खरबूजे की फसल की खेती की है और फसल भी पककर तैयार है। गत जनवरी माह में उन्होंने इन किस्मों की बिजाई की थी, इन फसलों में सुक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से पानी लगाया जाता है,जिससे पानी की भी बचत होती है। उन्होंने बताया कि उनके खेत से ही दिल्ली,गुरूग्राम,पानीपत सरीखे बड़े शहरों से व्यापारी माल उठा रहे हैं। उन्हें मंडी जाने की भी जरूरत नहीं है।
एक एकड में खरबूजे व तरबूज की पांच लाख तक पैदावार
किसान जिले सिंह ने बताया कि उनकी फसलों में आप तरबूज के रंग से लेकर अलग-अलग फलों का स्वाद चख सकते हैं। वे बताते हैं कि रमैया किस्म के खरबूजे में जहां आप खटटा मीठा के साथ-साथ वनास्पति,आम और नींबू जैसा स्वाद पा सकते हैं। वहीं आरोही किस्म के तरबूज अंदर से लाल की बजाय पीले रंग का है,जिसमें अनानास फल जैसा स्वाद खाने को मिलता है। उन्होंने बताया कि उनकी खरबूजे और तरबूज की पैदावार से प्रति एकड चार से पांच लाख रपए तक बिक्री होती है। इनमें खास बात यह है कि मुस्कान किस्म का खरबूजा फसल उतारने के बाद जल्दी से खराब नहीं होता,लिहाजा इसकी भंडारण क्षमता 20 दिन तक रहती है और इसमें चीनी से भी ज्यादा मिठास खाने में पाया जाता है। 
हरेक किसान बागवानी और जल संरक्षण को दें बढावा : डीसी
इस संदर्भ में जिला उपायुक्त यशेंद्र सिंह कहते हैं कि प्रदेश सरकार जल संरक्षण को बढावा देने और किसानों का बागवानी की ओर रूझान हो,इसके लिए अनेक योजनाओं के माध्यम से किसानों को लाभांवित कर रही है। सरकार चाहती है कि किसान परंपरागत फसलों की बजाय अधिक मुनाफा देने वाली बागवानी की खेती को बढावा दें। उनका कहना है कि प्रगतिशील किसान जिले द्वारा बागवानी के क्षेत्र में किए जा रहे सकारात्मक प्रयासों से निश्चित रूप से दूसरे किसानों को फायदा मिलेगा। सरकार चाहती है कि प्रदेश का हर किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो। उनका मानना है कि जिला रेवाडी बागवानी,उद्योग सहित हर क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित करे
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Editor - राजेश शर्मा : रेवाड़ी (हरि.) - 9813263002

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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