expr:class='"loading" + data:blog.mobileClass'>

GoddaNews: दक्षता विकास हेतु केचुआ खाद उत्पादन प्रशिक्षण संपन्न




ग्राम समाचार गोड्डा, ब्यूरो रिपोर्ट:-   ग्रामीण विकास ट्रस्ट-कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में "गरीब कल्याण रोजगार अभियान के अन्तर्गत प्रवासी श्रमिकों के जीविकोपार्जन हेतु दक्षता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम" के तहत "केंचुआ खाद उत्पादन" विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। सभी प्रवासी श्रमिकों को फेस मास्क के साथ सामाजिक दूरी के नियमानुसार सभागार में बैठाया गया। वरीय वैज्ञानिक-सह-प्रधान डाॅ0 रविशंकर ने प्रवासी श्रमिकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि केंचुआ को किसानों का सच्चा मित्र कहा जाता है, जो भूमि में नाइट्रोजन, पोटास, फॉस्फोरस, कैल्सियम तथा मैग्नेशियम तत्वों को बढ़ाता है, जो भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए आवश्यक है | केंचुआ खाद सभी प्रकार के पेड़-पौधों, फल वृक्षों, सब्जियों, फसलों के लिए पूर्णरूप से प्राकृतिक, सम्पूर्ण व सन्तुलित आहार (पोषण खाद) है| केंचुआ खाद के लघु उद्योग से प्रवासी श्रमिकों, ऋणियों एवं भावी-पीढ़ी को रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं। सस्य वैज्ञानिक डाॅ0अमितेश कुमार सिंह ने प्रवासी श्रमिकों को बताया कि गोबर को खाद के रूप में परिवर्तित करके


मिट्टी की उर्वरता में जिस एक जीव की सर्वाधिक भूमिका होती है, वह केंचुआ है। इसकी खूबियों के कारण ही इसे प्रकृति का हलवाहा भी कहा जाता है। ये केंचुए पौधों के जड़, पत्ती, तने एवं खेत के अन्य कार्बनिक पदार्थों को विघटित करके उसे कीमती खाद में परिवर्तित कर देते हैं। केंचुआ खाद तैयार करने में उपयोगी केंचुए की दो प्रजातियाँ ऐसीनिया फोटिडा तथा युड्रिलस युजीनी, सीमेंटेड वर्मी बेड, प्लास्टिक वर्मी बेड तैयार करना एवं केंचुआ खाद से होने वाले आर्थिक लाभ के विषय पर विस्तृत जानकारी दी। गोड्डा जिला में जैविक खेती की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए केंचुआ खाद की बाजार में वृहद स्तर मांग होना निश्चित है। अत: केंचुआ खाद को अच्छे से पैकेजिंग करके ग्रामीण, जिला एवं राज्य स्तर पर तैयार केंचुआ खाद का व्यापार किया जा सकता है। केंचुआ खाद उत्पादन को स्वरोजगार के रूप में अपना कर प्रवासी श्रमिक अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। आई.सी.ए.आर. नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ0 शिवधर मिश्रा का केंचुआ खाद उत्पादन एवं लाभ विषय पर बनी फिल्म का प्रसारण सभागार में किया गया। कृषि प्रसार वैज्ञानिक डाॅ0 रितेश दुबे ने वेस्ट डीकम्पोजर के घोल से कम्पोस्ट तैयार करने की विधि, जैविक कीटनाशी तैयार करके फसलों, सब्जियों, फलदार वृक्षों में छिड़काव करने की विस्तृत जानकारी दी। सभी प्रवासी श्रमिकों के बीच तरल जैविक खाद, सोलह वेस्ट डीकम्पोजर की शीशी, बैंगन, बरबट्टी, लाल साग का बीज एवं प्रमाण पत्र वितरित किया गया। कृषि प्रसार वैज्ञानिक डाॅ. रितेश दुबे ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। मौके डाॅ0 सूर्यभूषण, डाॅ0 हेमन्त कुमार चौरसिया, डाॅ0 प्रगतिका मिश्रा, राकेश रौशन कुमार सिंह, रजनीश प्रसाद राजेश, वसीम अकरम, राजेश आदि मौजूद रहे। लक्ष्मी देवी, रूबी देवी, तेतर मांझी, आशीष कुमार, यदुनंदन राउत, हीरा मांझी समेत 35 प्रवासी श्रमिक प्रशिक्षण में सम्मिलित हुए।

Share on Google Plus

Editor - भुपेन्द्र कुमार चौबे

ग्राम समाचार से आप सीधे जुड़ सकते हैं-
Whatsaap Number -8800256688
E-mail - gramsamachar@gmail.com

* ग्राम समाचार से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें

* ग्राम समाचार के "खबर से असर तक" के राष्ट्र निर्माण अभियान में सहयोग करें। ग्राम समाचार एक गैर-लाभकारी संगठन है, हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।
- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 comments:

टिप्पणी पोस्ट करें