Bhagalpur News:संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने को लेकर अंगिका मानव श्रृंखला रविवार को, लोगों से मानव श्रृंखला में शामिल होने की अपील

ग्राम समाचार, भागलपुर। रविवार 23 फरवरी को सैंडिस कम्पाउण्ड में होने वाले अंगिका मानव श्रृंखला को लेकर जिले भर में बैठकों और जनसंपर्क अभियान का दौर जारी है। सबसे बड़ी बात यह है कि अंगिका मानव श्रृंखला को सभी वर्ग का समर्थन भी मिल रहा है। दरअसल अंगिका भाषा से यहां के लोगों का भावनात्मक लगाव है। आज भी यहां लोगों के घरों में आपसी संवाद अंगिका में ही होती है। अंगिका महसभा के सदस्यों का कहना है कि अंगिका हमारी माँ की भाषा और पेट से जुड़ा हुआ सवाल है। देश और राज्‍य के राजनेता अब अंगिका भाषियों की सहनशीलता को कायरता समझने की भूल नहीं करें। हमारी अंगिका भाषा को जब तक सारे सम्‍मान और अधिकार नहीं मिलेंगे, तब तक न हम चैन से बैठेंगे और न  राजनेता को चैन से बैठने दैंगे। डॉ. अमरेन्द्र ने कहा कि हमारे पूर्वजों के सभी ज्ञान, उन्होंने जो कुछ जाना और जिस भाषा में उन्होंने बद्‍ध किया, वह तो लोकभाषा अंगिका ही थी। अगर हम अंग प्रदेश की बात करें तो वह अंगिका ही थी और अंगिका में हमारे इस अंचल के सभी ज्ञान-विज्ञान और अध्यात्म की बातें निहित है। डॉ.मधुसूदन झा ने कहा कि अगर हमारी भाषा मर जाएगी तो हजारों साल से जो हमारे पूर्वजों का ज्ञान है, वह भाषा के मरने के साथ ही वह ज्ञान भी मर जाएगी और हमारा अतीत से संबंध कट जाएगा। गीतकार लक्ष्‍मी नारायण मधुलक्ष्‍मी ने कहा कि हमारे संबंध, हमारे संस्कार जो हैं, वह हमारे पूर्वजों का ही दिया हुआ है। इसे हम किसी भी कीमत पर मरने नहीं दैंगे। देवज्‍योति मुखर्जी ने कहा कि जो हमारी पहचान है। उस भाषा के मरने के साथ ही हमारी पहचान भी मर जाएगी। इसलिए यह जरूरी है कि खुद को जिंदा रखने के लिए हम अपनी भाषा को एकजुट होकर बचाएं। ओम भास्‍कर ने कहा कि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें, हमारी संस्कृति यही सिखाती है। चिंटू दत्‍ता ने कहा कि हम सब को अपनी अंगिका भाषा को बचाकर  रखने होंगे, क्‍योंकि हिंदी में तो अब विदेशी भाषाओं की कब्‍जा हो चुका है। पप्‍पू सिंह ने कहा कि कोई भाषा को या फिर अपनी राष्ट्रभाषा को बचाने के लिए, हम अपनी मातृभाषा को कोई कीमत पर मरने नहीं दैंगे। अजीत सिंह ने कहा कि उन्‍हें किसी भाषा से कोई बैर नहीं है लेकिन यह भी तय है कि हमारी मातृभाषा अंगिका की उपेक्षा करने वालों की भी खैर नहीं होगी। संयोजक गौतम सुमन ने कहा कि राष्ट्रीयता के नाम पर अगर राष्ट्रीय भाषा का संरक्षण जरुरी है तो उपराष्ट्रीयता भी उतना ही जरूरी है। इस बात को हम समझ चुके हैं कि लोकभाषा यानी अपनी मातृभाषा को बचाकर रखना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमें यह भी समझना चाहिये कि हमारी जो नई ज्ञान है, वह विज्ञान की बात है। उन्होंने बताया कि अंगिका ज्ञान और विज्ञान की भाषा है। इसे अब वोट की भाषा बनानी होगी और जिस दिन अंगिका वोट की भाषा बन जाएगी। उस दिन अंगिका अपनी सभी हक-हकूक को पाने की दिशा में आगे बढ़ जाएगी। पर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.डीपी सिंह, डॉ.संजीव लाल, पटेल स्‍मारक समिति के अध्‍यक्ष डॉ.एसपी सिंह और कांग्रेसी नेता परवेज जमाल ने अंगिका भाषा के लिए हो रहे मानव श्रृंखला में समर्थन का ऐलान करते हुए जिले वासियों को 23 तारीख को अंगिका मानव श्रृंखला में शामिल होने का आह्वान किया। 
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