लोकसभा चुनाव के साथ महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में विधानसभा चुनाव कराने पर फैसला जल्द

Election-Commissionग्राम समाचार नई दिल्ली। महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ ही कराने के बारे में जल्दी ही अंतिम फैसला होने की संभावना है। बीजेपी सूत्रों के अनुसार पार्टी आलाकमान राज्य इकाइयों से बातचीत कर इस बारे में फैसला करेगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सारे चुनाव एक साथ कराने की वकालत करते रहे हैं। ऐसे में अप्रैल मई में आम चुनावों के साथ इन राज्यों के चुनाव कराने की चर्चा भी शुरू हो गई है। वैसे भी आम चुनावों के साथ आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के चुनाव होने हैं। संभावना है कि जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनाव भी साथ में ही हों।हालांकि बीजेपी शासित महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा की बीजेपी इकाइयां जल्दी चुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि अभी राज्य सरकारों के कई महत्वपूर्ण काम हैं जिन्हें पूरा करना जरूरी है। हरियाणा विधानसभा का कार्यकाल दो नवंबर 2019 तक है। झारखंड का पांच जनवरी 2020 तक। जबकि महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल नौ नवंबर 2019 तक है। एक साथ चुनाव कराने के बारे में नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इसकी शुरुआत इस साल लोकसभा चुनाव के साथ ही हो सकती है।
इसके लिए झारंखड, महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव लोक सभा चुनाव के साथ ही कराने चाहिए। इसके लिए महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा के कार्यकालों में पांच-पांच महीने की कटौती और झारखंड विधानसभा के कार्यकाल में सात महीने की कटौती की जा सकती है। महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन को लेकर हालात तेजी से बदल रहे हैं। पहले शिवसेना अलग चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी थी। लेकिन अब संभावना है कि दोनों पार्टियां साथ ही चुनाव लड़ें। शिवसेना चाहती है कि लोकसभा के साथ ही विधानसभा को लेकर भी सीटों का बंटवारा हो जाए। पिछली बार दोनों पार्टियों ने लोकसभा चुनाव एक साथ लेकिन विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा था। ऐसे में माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में भी लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव कराने का फैसला हो सकता है। उधर, हरियाणा में सबकी नजरें जींद के विधानसभा उपचुनाव पर टिकी हैं।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि वैसे तो विधानसभा चुनाव समय पर ही होने चाहिए। लेकिन अगर बीजेपी जींद का विधानसभा उपचुनाव जीतती है तो पार्टी आलाकमान लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव कराने का सुझाव दे सकता है। इसकी एक बड़ी वजह स्थानीय निकायों के चुनावों में बीजेपी को मिली कामयाबी और बिखरा विपक्ष है। झारखंड में राज्य इकाई का मानना है कि जल्दी चुनाव कराने से कोई लाभ नहीं होगा। उनके मुताबिक अभी राज्य सरकार की करीब छह महीने की बड़ी योजनाओं पर काम होना बाकी है। ऐसे में बेहतर होगा कि झारखंड का चुनाव समय पर ही कराया जाए।

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