आर्थिक आरक्षण पर संसद की मुहर, 124वां संविधान संशोधन विधेयक रास से भी बहुमत से पास, विधेयक के समर्थन में 165 और विरोध में मात्र सात मत पड़े

parliamentग्राम समाचार,नई दिल्ली। राज्यसभा ने भी बुधवार को सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थाओं (सरकारी आर्थिक सहयता प्राप्त भी) में 10 फीसद आरक्षण के लिए लाए गए 124वें संविधान संशोधन विधेयक 2019 को बहुमत से पारित कर दिया। विधेयक के पक्ष  में 165 और विरोध में सात मत पड़े।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने ये विधेयक सदन में अपराह्न पेश किया। इस पर र्चचा की शुरुआत सदन में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने की।

इसके बाद सदन के तकरीबन 35 सदस्यों ने अपनी राय और सुझाव रखे। राजद, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, अन्ना द्रमुक सदस्यों के अलावा और एक दो सदस्यों के विरोध के अलावा ज्यादातर दलों ने विधेयक का समर्थन किया। वहीं कुछ सदस्यों ने इसे सलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग की। लेकिन मतविभाजन में यह प्रस्ताव नामंजूर कर दिया हो गया। इसके पक्ष में 18 और 155 विरोध में पड़े। गहलोत ने तकरीबन 10 घंटे की र्चचा का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक अच्छे इरादे और अच्छी नीति से लाया गया है। जो सदस्य इसका समर्थन कर रहे हैं मैं उनका धन्यवाद करता हूं। उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि आरक्षण की व्यवस्था कांग्रेस ने की और संवैधानिक दायरे में की। लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक रूप से पिछड़ों को लाभ पहुंचाने के लिए जो संशोधन विधेयक लाने का काम किया है सभी सदस्य इसको पास कराने में अपनी भूमिका निभाएं। जबकि इससे पहले विपक्ष के अनेक सदस्यों ने विधेयक के समय और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने राज्यसभा में सामान्य वर्ग के लोगों को शैक्षणिक संस्थाओं और नौकरियों में आर्थिक आधार पर आरक्षण देने संबंधी संविधान 124वां संशोधन विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह जल्दबाजी में पेश नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर काफी दिनों से बहस जारी थी। गहलोत ने कहा कि निजी विधेयक और प्रश्न पूछ कर लगातार सामान्य वर्ग के कमजोर वर्ग को आरक्षण की बहस को आगे बढ़ाया जा रहा था।

उन्होंने कहा कि मंडल आयोग ने भी सामान्य वर्ग के लिए 10% आरक्षण की बात की थी और 1991-92 में नरसिंह राव सरकार ने भी इसकी वकालत की। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री ने कहा कि आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार की अच्छी सोच है, जो सामान्य वर्ग के लाखों-करोड़ों गरीब परिवारों के लिए बहुत कारगर साबित होगी। उन्होंने कहा कि इससे देश में समता और समरस्ता का वातावरण निर्मित होगा।

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