लोकसभा चुनाव-2019 से पहले BJP के सबसे बड़े दांव को क्या राहुल गांधी ने नाकाम कर दिया

rahulscindiaग्राम समाचार, नई दिली ।  किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा इस समय देश में छाया हुआ है। कांग्रेस ने सरकार बनाते ही अपना वादा पूरा किया और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में किसानों के कर्ज माफ करने का ऐलान कर दिया है। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ऐलान कर दिया है कि किसानों के कर्ज माफी के लिए हम केंद्र सरकार पर दबाव बनाएंगे। जब तक किसानों का कर्ज माफ नहीं किया जाता, तब तक हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न बैठने देंगे और न ही सोने देंगे। राहुल ने कहा, ‘हमने वादा किया किया था दस दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ करेंगे। दो राज्यों में छह घंटे भी नहीं लगे और तीसरे राज्यों में भी जल्द कर्ज माफ होगा। मोदी जी चार साल से पीएम हैं, किसान का एक रुपया माफ नहीं किया। दरअसल पिछले कई सालों से किसानों की कर्जमाफी का फैसला चुनाव में जीत की गारंटी बन गया है। राहुल गांधी के इस बयान ने ऐसा लग रहा है बीजेपी के सबसे बड़े दांव पर पानी फेर दिया है।

कब-कब लिया गया कर्जमाफी का फैसला और चुनाव परिणाम

  • साल 2017 में उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने किसानों के कर्ज माफी का वादा किया था। इस चुनाव में भाजपा ने 400 में से 325 सीटों पर जीत हासिल की थी।
  • साल 2018 में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान जेडीएस ने कर्ज माफी का वादा किया था। इसके बाद एचडी कुमारस्वामी ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई।
  • गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने किसानों से वादा किया था कि अगर वह सत्ता में आती है तो उनके कर्ज का ब्याज सरकार चुकाएगी।
  • पंजाब में भी कांग्रेस ने कर्ज माफी का ऐलान किया था और वहां पर विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की है।
  • साल 2008 में भी तत्कालीन वित्त मंत्री पी। चिदंबरम ने 60 हजार करोड़ की कर्ज माफी का ऐलान किया था और कांग्रेस ने 2009 के लोकसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज की थी।

राजस्थान में किसानों की कर्जमाफी के बाद सचिन पायलट ने कहा, कांग्रेस जो कहती है वह करती है

क्या राहुल गांधी ने छीन लिया बीजेपी से मौका

राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा थी कि लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मोदी सरकार किसानों की कर्ज माफी का ऐलान कर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में थी लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लपक लिया और तीन राज्यों में सरकार बनते ही कर्जमाफी का ऐलान करा दिया और ऐलान कर दिया कि मोदी सरकार से भी इसका ऐलान कराकर रहेंगे और तब तक पीएम मोदी को सोने नहीं देंगे। अब सरकार के सामने दुविधा इस बात की भी है अगर वह इस पर आगे बढ़ती भी है (जिसकी संभावना बेहद कम है) तो सारा क्रेडिट राहुल गांधी को मिल जाएगा। मीडिया में आई रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्री अरुण जेटली ने किसान कर्ज माफी की बात को नकार दिया है और फैसला लेने के लिए राज्यों पर छोड़ दिया। हालांकि नीति आयोग का कहना है कि सरकार इस पर विचार कर सकती है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने एनडीटीवी से कहा- अगर पूरे देश में ऐसे हालात होते हैं कि कर्जमाफी जरूरी है तो केंद्र सरकार इस बारे में सोचेगी। एक बार ये फैसला 2008 में हो चुका है। अगर जरूरी हुआ तो इस मसले पर कम से कम बात तो हो ही सकती है। इस प्रस्ताव पर विचार संभव है।

ताजा समाचार