इतिहास में पहली बार : 10 साल की मेहनत लाई रंग, जैव-ईंधन से देहरादून से दिल्ली के लिए उड़ा स्पाइसजेट की विमान विमान

SPICE-JETग्राम समाचार, नई दिल्ली। सस्ती विमानन सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी, स्पाइसजेट ने सोमवार को आंशिक रूप से जैव-ईधन संचालित देश की पहली परीक्षण उड़ान का सफलतापूर्वक परिचालन किया। मिश्रित जैव-ईधन के साथ विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के मिशण्रसे लैस स्पाइसजेट के क्यू400 उड़ान संख्या वाले विमान ने सोमवार को उड़ान भरी।
इस अवसर पर वहाँ महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्या और स्पाइसजेट के मुख्य रणनीति अधिकारी जी.पी. गुप्ता भी उपस्थित थे। देश का पहला जैव विमान ईंधन तैयार करने वाले भारतीय पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट देहरादून के निदेशक डॉ. अंजन रे इसी विमान से दिल्ली तक आये।
दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय अड्डे पर 45 मिनट की उड़ान पूरी कर जब विमान उतरा तो नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु, सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन तथा नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने उसका स्वागत किया।

किफायती विमान सेवा स्पाइसजेट ने इस परीक्षण उड़ान का आयोजन किया था। यह व्यायवासिक हालांकि उड़ान नहीं थी। इसमें 23 यात्री तथा चालक दल के सदस्य शामिल थे। यात्रियों में एयरलाइन के विशेषज्ञ, नागर विमानन महानिदेशालय के अधिकारी तथा विशेषज्ञ और डॉ. रे शामिल थे।

इस परीक्षण उड़ान के लिए बोम्बार्डियर के क्यू 400 विमान का इस्तेमाल किया गया था। इसके बायें इंजन में पारंपरिक विमान ईंधन और दायें इंजन में 25 प्रतिशत जैव ईंधन मिश्रित विमान ईंधन था। कुल 430 लीटर जैविक ईंधन मिलाया गया था जिसे आईआईपी की प्रयोगशाला में तैयार किया गया था। इससे पहले रविवार को देहरादून के आकाश में ही विमान ने 25 मिनट तक जैव विमान ईंधन के साथ उड़ान भरी थी।

डॉ. रे ने बताया कि जैव विमान ईंधन तैयार करने पर आईआईपी ने करीब 10 साल पहले वर्ष 2009 में अनुसंधान शुरु कर दिया था। वर्ष 2010 तक लगा कि हमने कुछ तैयार कर लिया है। वर्ष 2010 से 2013 तक प्रयोगशाला में इतना जैव विमान ईंधन तैयार हो गया था कि उसे प्रैट एंड ह्विटनी इंजनों पर प्रयोग के लिए कनाडा भेजा गया। यह प्रयोग सफल रहा। सोमवार को परीक्षण के दौरान क्यू400 विमान में प्रैट एंड ह्विटनी के वही इंजन लगे थे जिन पर पाँच साल पहले कनाडा में परीक्षण किया गया था। अंतर यह है कि आज का परीक्षण वास्तविक उड़ान के दौरान किया गया था।

इस विमान ने देहरादून से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 2 पर इस विमान की अगवानी प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों और विमानन कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने की।

इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 2 पर इस विमान की अगवानी प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों और विमानन कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने की। नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा, सरकार 2035 तक एक पर्यावरण अनुकूल विमानन कार्ययोजना बनाएगी। यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि एटीएफ की अधिक कीमत होने के कारण भारतीय विमानन क्षेत्र की सभी दिग्गज कंपनियां 2018-19 की पहली तिमाही में घाटा होने की बात कह रही हैं। फिलहाल, ईंधन कीमत घरेलू विमानन की कुल परिचालन लागत का 50-55 प्रतिशत है।

दुनिया के जिन देशों में एटीएफ की कीमत सर्वाधिक है, उसमें भारत भी शामिल है, क्योंकि यहां राज्य लेवी और कर जुड़ जाते हैं। जहाजरानी उद्योग में इस्तेमाल होने वाले बंकर ईंधन की तरह ईंधन जीएसटी के दायरे में नहीं आता। विमान के यहां पहुंचने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, एटीएफ के साथ जैव-ईंधन का मिशण्रकरने की नीति, उपयोग और मानकीकरण पर कैबिनेट ने संज्ञान लिया है और इसे जल्द ही तैयार किया जाएगा।

10 साल की मेहनत का नतीजा

इस परीक्षण उड़ान के लिए बोम्बार्डियर के क्यू400 विमान का इस्तेमाल किया गया था। इसके बायें इंजन में पारंपरिक विमान ईंधन और दायें इंजन में 25 प्रतिशत जैव ईंधन मिश्रित विमान ईंधन था। कुल 430 लीटर जैविक ईंधन मिलाया गया था जिसे आईआईपी की प्रयोगशाला में तैयार किया गया था। इससे पहले रविवार को देहरादून के आकाश में ही विमान ने 25 मिनट तक जैव विमान ईंधन के साथ उड़ान भरी थी। जैव विमान ईंधन तैयार करने पर आईआईपी ने करीब 10 साल पहले वर्ष 2009 में अनुसंधान शुरू कर दिया था। वर्ष 2010 तक लगा कि कुछ तैयार कर लिया गया है। वर्ष 2010 से 2013 तक प्रयोगशाला में इतना जैव विमान ईंधन तैयार हो गया था कि उसे प्रैट एंड विटनी इंजनों पर प्रयोग के लिए कनाडा भेजा गया। यह प्रयोग सफल रहा।