भरोसे व उम्मीदों का बजट आज, वित्त मंत्री अरुण जेटली पर रहेंगी सबकी निगाहें

arun jeteliग्राम समाचार, नई दिल्ली।   मोदी सरकार का पांचवां बजट उम्मीदों वाला बजट होगा। पिछले चार वर्षो में केंद्र सरकार ने सिस्टम सुधारने के जो प्रयास किए हैं उसकी झलक बृहस्पतिवार को पेश होने वाले बजट में दिखेगी।

  • जीएसटी लागू होने के बाद बजट में वस्तुओं की कीमतें घटने या बढ़ने का आकर्षण तो नहीं होगा लेकिन आयकर में छूट देने से वेतन भोगियों को राहत जरूर मिल सकती है।
  • इस बजट में जेटली के लिए राजकोषीय लक्ष्यों को साधने के साथ आर्थिक विकास की रफ्तार में आने वाली अड़चनों का समाधान ढूंढना बड़ी चुनौती होगी।
  • केंद्रीय वित्त मंत्री कल सुबह लोकसभा में अपना पांचवां पूर्ण बजट पेश करेंगे। अगले साल आम चुनाव होने के कारण वह लेखानुदान पेश करेंगे। इसलिए देश की जनता इसी बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठी है।

लेकिन नोटबंदी और जीएसटी के कारण अर्थव्यवस्था में एक बड़ा भूचाल आने के कारण सरकार के पास इतनी गुंजाइश नहीं है कि देशवासियों को रेवड़ियां बांट सके इसलिए बजट संभावनाओं पर केंद्रित होगा। हालांकि जेटली के समक्ष बजट घाटे को कम करने की राह पर बने रहने की कठिन चुनौती भी है। अगर भारत इस डगर से चूकता है तो नियंतण्र निवेशकों व रेंटिग एजेंसियों की निगाह में भारत की साख जोखिम में आ सकती है। जेटली ने राजकोषीय घाटे को मौजूदा वित्त वर्ष में घटाकर जीडीपी के 3.2 फीसद पर लाने का लक्ष्य रखा था। आगामी वित्त वर्ष 2018-19 में घटाकर तीन फीसद किया जाना है।अरुण जेटली आयकरदाताओं को राहत दे सकते हैं। अभी 2.5 लाख रपए तक की आय टैक्स फ्री है। ढाई से पांच लाख रपए तक की आय पर पांच फीसद टैक्स देना होता है। वित्त मंत्री आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर तीन लाख रपए कर सकते हैं। इससे करीब 1.35 करोड़ आयकर दाताओं को राहत मिलेगी। सबसे अधिक आयकरदाता इसी स्लैब में आते हैं। दूसरा विकल्प पांच लाख से 10 लाख के बीच के स्लैब में आने वाले करदाताओं के लिए है। इस स्लैब में 20 फीसद आयकर वसूला जाता है। एक विकल्प यह हो सकता है कि सरकार पांच लाख से 7.50 लाख रपए के स्लैब में आने वालों से 10 फीसद आयकर वसूले और 7.50 लाख से लेकर 10 लाख रपए के स्लैब को 20 फीसद ही रहने दे।

पहले बजट फरवरी माह की अंतिम तिथि और शाम को पांच बजे पेश किया जाता था। यह परंपरा 1999 तक जारी रही। ब्रिटिश काल की यह परंपरा 2001 में टूटी और अटल बिहारी बाजपेयी सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने सुबह 11 बजे बजट पेश किया। नरेन्द्र मोदी सरकार ने फरवरी के अंतिम दिन बजट पेश करने की परंपरा को तोड़ते हुए 2017 से इसे एक फरवरी को पेश करना शुरू किया।