हर्षोल्लाष के साथ मनाई गयी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती

Rewari Boss Jayanti
ग्राम समाचार न्यूज़ रेवाड़ी {हरियाणा} : अतिरिक्त उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने मंगलवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया। कैप्टन मनोज कुमार ने इस मौके पर बताया कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 में उड़ीसा के कटक में हुआ। नेताजी का जन्म बंगाली परिवार में हुआ था। नेताजी के पिता जानकीनाथ कटक के मशहूर वकील थे। नेताजी को अपने देश से बहुत प्रेम था और उन्होनें अपनी पूरी जिंदगी देश को समर्पित कर दी थी। नेताजी बोस का मानना था कि अंग्रेजों के दुश्मनों का हाथ थामकर आजादी हासिल की जा सकती है। उनके विचारों को देखते हुए अंग्रेज सरकार ने कलकत्ता में उन्हें नजरबंद कर दिया, लेकिन वो वहां से भाग निकले। उनका मानना था कि स्वतंत्रता हासिल करने के लिए राजनीतिक गतिविधियों के साथ कूटनीतिक और सैन्य बल की आवश्यकता भी होती है। भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर 1943 को उन्होनें आजाद हिंद सरकार की स्थापना की और आजाद हिंद फौज का गठन किया तथा 4 जुलाई 1944 को बर्मा में उन्होनें अपना प्रसिद्ध नारा तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा दिया। अतिरिक्त उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने रेवाडी शहर के मॉडल टाउन स्थित आजाद हिन्द फौज के परिजनों को शॉल व गुलदस्तें भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। कैप्टन मनोज कुमार ने कहा कि सरकार की ओर से आईएनए के सेनानियों एवं शहीदों के परिजनों को सम्मानित करने की जो यह पहल की गई है वह निश्चित तौर पर युवा शक्ति में जहां देशभक्ति का जज्बा पैदा करने वाली पहल है वहीं देश के अमर शहीदों को यह एक सच्ची श्रद्धांजलि भी है। 
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नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के शुभ अवसर पर एसडीएम कुशल कटारिया ने मीरपुर गांव के आजाद हिन्द फौज के सिपाही अमीलाल को उनके घर जाकर उन्हें शाल ओढ़ाकर, प्रशस्ति पत्र तथा उस समय के देशभक्ति के गीतों का संग्रह भेंट किया। इस अवसर पर कोसली के एसडीएम रविन्द्र यादव गांव कोसली के आजाद हिन्द फौज के सिपाही श्री मंगल सिंह व गांव भुरथला के श्री हरि सिंह के घर जाकर उन्हें शाल ओढ़ाकर, प्रशस्ति पत्र तथा उस समय के देशभक्ति के गीतों का संग्रह भेंट किया। इस अवसर पर नगराधीश डा. विरेन्द्र ने मुसेपुर गांव के आजाद हिन्द फौज के सिपाही श्री रामनारायण को उनके घर जाकर उन्हें शाल ओढ़ाकर, प्रशस्ति पत्र तथा उस समय के देशभक्ति के गीतों का संग्रह भेंट किया। जिला प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आजाद हिन्द फौज के 48 सिपाहियों के परिजनों को उनके घर जाकर शॉल व गुलदस्तें भी भेंट कियें।