रमजान रहमतों बरकतों का महीना, मो०अब्दुला आशमिन

gslogoग्राम समाचार, गोड्डा। गोड्डा रमजान के पवित्र महीने का पहले जुमा का नमाज रोजदारों ने अदा की। इस दौरान आसनबनी मस्जिद के मौलाना मो०आशमिन ने बुधवार को बताया कि पूरे वर्ष में जून का महीना सबसे अहम है, इस महीने में मुसलमानों का रोज फर्ज अनिवार्य है।

इस एक महीने तक रोजेदार सुबह सादिक से लेकर सूरज डूबने तक खाना, पीना तथा हर तरह के गुनाहों से बच के रहते हैं।

रोजे का मतलब सिर्फ भूखे रहना नहीं बल्कि आने वाले ग्यारह महीने इसी तरह पाकीजा जिंदगी गुजारे, और कहा कि रमजान सिर्फ उसी को वर्जित है जो माँ बच्चों को दूध पिलाती है, जो बूढ़ा और असर्मथ है।

रमजान के पूरे महीने को तीन अशरा में बांटा गया है, एक अशरा 10 दिनों के रहमत का, दूसरा अशरा भगफिरत का और तीसरा अशरा जहन्नम से छुटकारा का, यह महीना रहमतों और बरकतों का है। अल्लाह इस महीने के रिज्क को बढ़ा देता है सैतान को कैद कर लिया जाता है ताकि रोजेदारों को न बहका सके।

समुद्र की मछलियां भी दुआ करती है और इफ्तार के समय तक दुआ करती रहती है।

इस महीने में अल्लाह ने कुरआन नाजिल फरमाया। सबसे बड़ी बात यह है कि रोजेदार को रोजे के बदले अल्लाहतआला खुद देंगे। रोजा हमें यह एहसास दिलाती है कि वैसे गरीब व्यक्ति जिन्हें कई-कई दिनों तक खाना नसीब नहीं होता है उन्हें कैसा महसूस होता होगा रोजा गरीबों और भूखों के प्रति दया उत्पन्न करता है।

इसलिए इस महीने में गरीब पर विशेष ध्यान रखा जाता है और गरीबों को फिरता दान दिया जाता है। जो आवश्यक है तिव्य दृष्टिकोण से भी रोजा की बड़ी अहमियत है।

– पारस झा, ग्राम समाचार (गोड्डा)।