झारखंड गठन का उद्देश्य अबतक असफल – राजीव रंजन भगत

ग्राम समाचारग्राम समाचार, महगामा। झारखंड स्थापना दिवस पर हम गर्व करें या पश्चाताप समझ में नहीं आ रहा है। 17 वर्ष में हम कहां तक पहुंचे और कहां तक पहुँचना चाहिए, नि:संदेह चिंतन का विषय है। राज्य की जनता ने निर्दलीय सहित लगभग सभी पार्टी को सरकार बनाने का मौका दिया लेकिन जनता को क्या मिला? आज भी हम भ्रष्टाचार आदि मुद्दों पर बोल नहीं सकते हैं। भ्रष्ट मंत्री से लेकर भ्रष्ट सरकारी तंत्र तक से जनता क्या आशा करेगी।

झारखंड बनने के बाद से लेकर आज तक झारखंड को सिर्फ और सिर्फ लूटा गया है। इस लूटतंत्र में प्रशासन को केवल लूटेरों की संभवतः चौकीदारी के लिए रखा गया। आज 17 वर्ष के बाद भी विधायक निधि/ संसद निधि/ मनरेगा आदि में कमीशन जन्मजात अधिकार के तरह कायम है। राज्य में गैर अधिसूचित और अधिसूचित जिला भी राज्य में दो राज्य की अनुभूति दिलाती है। ऐसे में झारखंड गठन का उद्देश्य अबतक असफल रहा है।

(यह लेखक के अपने विचार हैं)