खोरठा भाषी कलाकार की उपेक्षा होती रही हैं – विनय तिवारी

विनय तिवारीग्राम समाचार, धनबाद (झारखंड)। झारखण्ड सरकार से सम्मानित खोरठा गीतकार विनय तिवारी का कहना हैं कि झारखण्ड के खोरठा भाषी कलाकार आज भी उपेक्षित हैं।

खोरठा भाषियों की संख्या सबसे ज़्यादा लगभग ढाई करोड़ होने के बावजूद फिल्म तकनिकी सलाहकार समिति में एक भी खोरठा भाषी कलाकार को जगह नहीं दिया गया। खोरठा भाषा के विकास, संरक्षण और सम्मान के लिए विनय तिवारी हमेशा से ही आंदोलन करते रहें हैं। झारखण्ड के खोरठा गीत संगीत में भी इनका एक बहुत बड़ा योगदान हैं।

इसी क्रम में 21 फरवरी को एक बार फिर इन्हीं की सोच से खोरठा कुड़माली अधिकार रैली का आयोजन किया गया। यह शोभा यात्रा खोरठा कला साहित्य संस्कृति मंच के बैनर तले पॉलिटेक्निक मोड़ धनबाद से रणधीर वर्मा चौक तक निकाली गई। कार्यक्रम के संरक्षक पूर्व मंत्री मथुरा प्रसाद महतो हैं।

इस संबंध में श्री महतो का कहना हैं कि वे खोरठा कुड़माली भाषा को सम्मान दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए झारखण्ड के 18 ज़िलों के कलाकारों ने अपना समर्थन दिया। अमन राठौर, रंजीत कुमार, डॉ सुधाकर गोस्वामी, सुकुमार आदि लोगों ने इस कार्यक्रम को सफल करने के लिए विनय तिवारी का भरपूर साथ दिया। इस कार्यक्रम के माध्यम से सभी कलाकारों ने अपना विरोध प्रकट किया। साथ ही सरकार से यह मांग भी की गई कि फिल्म तकनीकी सलाहकार समिति में खोरठा कुड़माली भाषी कलाकार को जगह मिलनी चाहिए।

–  युधिष्ठिर महतो, ग्राम समाचार, धनबाद (झारखंड)।