नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

Faile fotoग्राम समाचार – नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा। मां ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक बेहद ही कठिन तपस्या की थी। इसी
कारण मां दुर्गा का एक नाम ब्रह्मचारिणी पड़ गया था। मां का ये रूप निराला है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी जानिए मां के इस स्वरूप की कैसे करें अराधना, क्या है पूजा विधि, व्रत कथा, आरती, मंत्र…

मां ब्रह्मचारिणी मां पार्वती का दूसरा स्वरूप है। मां के इस स्वरूप की पूजा करने से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। साथ ही जीवन के सभी कष्टों से छुटकारा प्राप्त होता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से पहले स्नान करके साफ वस्त्र धारण कर लें। देवी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करें। इसके बाद देवी को पंचामृत (दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु ) से स्नान करायें और फूल, अक्षत यानी कि साबुत चावल, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें। पूजा में लाल फूल का विशेष रूप से इस्तेमाल करें। पूजा में इस मंत्र का जाप करें- इधाना कदपद्माभ्याममक्षमालाक कमण्डलु देवी प्रसिदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्त्मा। इसके बाद कथा सुनें और घी और कपूर से देवी की आरती उतारें। अंत में मां को मिठाई का भोग लगाकर पूजा संपन्न करें।

मां ब्रह्मचारिणी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारद जी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। कुछ दिनों तक कठिन व्रत रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं।

कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह आप से ही संभव थी। आपकी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ।

– ग्राम समाचार

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